>समाजवादी पार्टी की नेता और गाज़ीपुर की जहूराबाद सीट से पूर्व विधायक सैय्यदा शादाब फातिमा ने बिहार चुनाव के नतीजों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग और सरकार दोनों पर लापरवाही तथा अपारदर्शिता के आरोप लगाए। उनका कहना है कि बिहार में यह वोट चोरी नहीं, बल्कि डकैती जैसी स्थिति थी।
>फातिमा ने कहा कि बिहार में SIR इतनी जल्दबाजी में लागू किया गया कि लोगों को इसे समझने का पर्याप्त समय ही नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने यह कहकर भ्रामक सूचना दी कि प्रदेश में 99.5% लोगों तक SIR के प्रपत्र पहुंचा दिए गए हैं, जबकि उनके विधानसभा क्षेत्र जहूराबाद में कई गांव ऐसे हैं जहां BLO द्वारा अब तक कोई प्रपत्र नहीं मिला। उनका आरोप है कि आयोग ने अधूरी तैयारी के साथ काम शुरू किया, जिससे बड़ी संख्या में मतदाता अनभिज्ञ रह गए। उन्होंने आयोग को झूठ बोलने की मशीन” तक कह दिया।
>पूर्व विधायक के अनुसार, 4 नवंबर से SIR शुरू हो गया जबकि उनके क्षेत्र में BLO को प्रपत्र 7 नवंबर को मिले, और कई गांवों में ये फॉर्म 12–13 नवंबर तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को BLO बना दिया गया, जबकि उनमें से कई को इस प्रक्रिया का कोई अनुभव नहीं था। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि 4 दिसंबर की अंतिम तिथि को कम से कम 20 दिन आगे बढ़ाया जाए और BLO को फॉर्म भरने व ऑनलाइन एंट्री की उचित ट्रेनिंग दी जाए।
>मदरसों की ATS जांच पर जवाब देते हुए फातिमा ने कहा कि यदि यूपी में मदरसों की जांच कराई जा सकती है, तो बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के खिलाफ भी आरोपों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, फिर भी उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। फातिमा ने कहा कि बिहार में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताएं स्पष्ट दिख रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि यहां PDA के प्रहरी सतर्क हैं।
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