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तीन महीने से ज्यादा जांच नहीं रोक सकेंगे अधिकारी, सीएम योगी ने तय की जवाबदेही

ईओडब्ल्यू की समीक्षा बैठक में लंबित मामलों के जल्द निस्तारण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और आर्थिक अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश।
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Bureau News Desk
10 Jun 2026
01:45 PM
1 min read
तीन महीने से ज्यादा जांच नहीं रोक सकेंगे अधिकारी, सीएम योगी ने तय की जवाबदेही
हाइलाइट्स
ईओडब्ल्यू की समीक्षा बैठक में लंबित मामलों के जल्द निस्तारण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और आर्थिक अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश।

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी तथा समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए हैं। ईओडब्ल्यू की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच अधिकारी किसी भी मामले को तीन महीने से अधिक समय तक अपने पास लंबित न रखें और इस संबंध में उनकी जवाबदेही भी तय की जाए। मुख्यमंत्री ने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी, गुणवत्तापूर्ण विवेचना और दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में आर्थिक अपराधों से जुड़े लंबित मामलों, विवेचनाओं, गिरफ्तारी, अभियोजन और संगठनात्मक सुधारों की स्थिति की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी, जालसाजी, गबन और अन्य आर्थिक अपराध न केवल सरकारी संसाधनों को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026 में 31 मई तक संगठन द्वारा 155 जांच, विवेचना और अनुवर्ती कार्यवाहियों का निस्तारण किया जा चुका है। इसी अवधि में 71 अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ने पुराने मामलों के निस्तारण में और तेजी लाने तथा वांछित अभियुक्तों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं, उनमें अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को गति दी जानी चाहिए। उन्होंने सुदृढ़ पैरवी, गुणवत्तापूर्ण विवेचना और साक्ष्यों के प्रभावी संकलन के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार दंडित कराया जा सके।

 

बैठक में बताया गया कि जांच और अनुवर्ती कार्यवाहियों के बेहतर प्रबंधन के लिए सीएमएस विकसित किया गया है। यह प्रणाली प्रकरणों के डिजिटल प्रबंधन, ऑनलाइन रिपोर्टिंग, रियल टाइम मॉनिटरिंग और डैशबोर्ड आधारित अनुश्रवण की सुविधा उपलब्ध कराती है। मुख्यमंत्री ने इसके प्रभावी उपयोग के निर्देश देते हुए कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था से जांच की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि होगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी जांच अधिकारी किसी मामले को तीन माह से अधिक समय तक अपने पास लंबित न रखे और आवश्यकता पड़ने पर उसकी जवाबदेही भी निर्धारित की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में निवेश संबंधी ठगी, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य आर्थिक अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करना भी आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि ईओडब्ल्यू द्वारा "जागरूकता, जानकारी, बचाव" अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से आम लोगों को विभिन्न प्रकार के आर्थिक अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस अभियान को और व्यापक स्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्थिक मामलों से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर देते हुए कहा कि पोंजी स्कीम, मल्टीलेवल मार्केटिंग, चिटफंड घोटाले और साइबर फ्रॉड जैसे मामलों से निपटने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती जा रही है, ऐसे में जांच एजेंसियों को आधुनिक संसाधनों और तकनीकी दक्षता से सुसज्जित किया जाना आवश्यक है।

 

बैठक में अधिकारियों और विवेचकों के प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, संगठन की क्षमता वृद्धि तथा विस्तार से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावी कार्यप्रणाली और आधुनिक संसाधनों के माध्यम से आर्थिक अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

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