ग्रेटर नोएडा में एक जीएसटी कंसल्टेंट को बंधक बनाकर 29 लाख रुपये की कथित जबरन वसूली के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। मामले में शिकायत पर समय से मुकदमा दर्ज नहीं करने और कार्रवाई में लापरवाही बरतने के आरोपों की आंतरिक जांच के बाद थाना बिसरख के प्रभारी निरीक्षक मुनेंद्र सिंह और राइस सिटी चौकी प्रभारी राहुल को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर की गई। जांच में पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज करने के स्तर पर थाना और चौकी प्रभारी की लापरवाही की पुष्टि होने की जानकारी दी गई है। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से कथित तौर पर वसूली गई नकदी और जेवरात भी बरामद किए गए हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घटना 20 जुलाई की है। जीएसटी कंसल्टेंट संदीप अपनी सोसाइटी के बाहर कार से जा रहे थे। इसी दौरान कार सवार करीब आधा दर्जन बदमाशों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने उन्हें बंधक बना लिया और डराने-धमकाने के बाद 29 लाख रुपये की रकम जबरन वसूल की। मामले में पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने के दौरान आरोपियों ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी। वर्दी पहनने का उद्देश्य पुलिस के अनुसार, लोगों को संदेह से बचाना था।
घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। जानकारी के अनुसार, पीड़ित लगातार थाना और चौकी के चक्कर लगाता रहा, लेकिन तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। पीड़ित ने मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर भी दर्ज कराई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने शिकायत को बिना ठोस कार्रवाई के निस्तारित दिखा दिया। यही पहलू बाद में पुलिस की आंतरिक जांच का हिस्सा बना। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कराई गई जांच में शिकायत पर कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने के स्तर पर लापरवाही की पुष्टि की गई।
मामला मीडिया के सामने आने और प्रमुखता से प्रसारित होने के बाद स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। इसके बाद पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया और आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने बुधवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से जबरन वसूली गई रकम के साथ जेवरात भी बरामद किए गए हैं। मामले में पुलिस की कार्रवाई का यह हिस्सा उस समय सामने आया, जब पीड़ित की शिकायत पर शुरुआती स्तर पर कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठे।
यह खबर भी पढ़े - 19 दिन से लापता दो दोस्तों के शव मंदिर परिसर में मिले, महंत फरार
मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद पूरे घटनाक्रम की आंतरिक जांच कराई गई। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के मीडिया प्रभारी उमेश नैथानी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि पीड़ित का मुकदमा दर्ज करने में थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी की ओर से लापरवाही बरती गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आयुक्त ने थाना बिसरख प्रभारी निरीक्षक मुनेंद्र सिंह और राइस सिटी चौकी प्रभारी राहुल को लाइन हाजिर करने का निर्णय लिया।
दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद थाना बिसरख का नया प्रभार निरीक्षक क्राइम सत्येंद्र सिंह को सौंपा गया है। इस प्रशासनिक बदलाव के साथ ही पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में हुई कार्रवाई और अधिकारियों की भूमिका की जांच अलग स्तर पर की गई है।
यह खबर भी पढ़े - बालाघाट में 8 बच्चों की मौत, बीमारी की वजह अब तक अनजान - पुणे भेजे गए सैंपल
मामले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से वसूली गई पूरी नकदी और जेवरात आदि बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी में यह भी बताया गया है कि वारदात के दौरान आरोपियों ने पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल किया था। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में आरोपियों की पहचान, उनके खिलाफ दर्ज धाराओं और बरामदगी की सटीक मात्रा का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
पूरे घटनाक्रम में कार्रवाई का क्रम इस प्रकार सामने आता है। 20 जुलाई को जीएसटी कंसल्टेंट को कथित तौर पर बंधक बनाकर 29 लाख रुपये की वसूली की गई। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की और थाना तथा चौकी स्तर पर कार्रवाई की मांग की। पीड़ित ने आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के निस्तारण के बाद भी मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और आरोपियों की गिरफ्तारी की। बुधवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कराई गई आंतरिक जांच में मुकदमा दर्ज करने के स्तर पर लापरवाही सामने आने पर थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया।
Explore Related Topics
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें