तेल संकट के बीच केंद्र ने उठाया बड़ा कदम, पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर पर मिलेगी बड़ी छूट

मध्य पूर्व तनाव के बीच उर्वरक और रसायन उद्योग को राहत
Bureau 02 Apr 2026, 11:46 AM 1 min read
तेल संकट के बीच केंद्र ने उठाया बड़ा कदम, पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर पर मिलेगी बड़ी छूट

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच केंद्र सरकार ने उर्वरक और रसायन उद्योग को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अमोनियम नाइट्रेट सहित कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क में छूट देने की घोषणा की है। यह छूट 2 अप्रैल से 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी।

 

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, करीब 40 प्रकार के पेट्रोकेमिकल कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों पर आयात शुल्क को समाप्त कर दिया गया है। इनमें अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल, फिनॉल, पीवीसी (पॉलीविनाइल क्लोराइड) और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे महत्वपूर्ण रसायन शामिल हैं।

 

सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध और आपूर्ति बाधाओं के कारण उद्योगों की लागत में वृद्धि देखी जा रही है। आयात शुल्क हटाने से इन उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने और लागत में कमी आने की संभावना है।

 

उर्वरक उद्योग के लिए यह निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमोनियम नाइट्रेट जैसे रसायन उर्वरक निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही इस पर लगने वाला कृषि ढांचा और विकास उपकर भी हटा दिया गया है, जिससे कंपनियों को अतिरिक्त राहत मिलेगी।

 

सरकार के इस निर्णय से उत्पादन लागत घटने, आपूर्ति श्रृंखला में सुधार आने और महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलने की संभावना जताई जा रही है। जिन रसायनों पर शुल्क हटाया गया है, वे बुनियादी औद्योगिक उपयोग के लिए आवश्यक हैं, जिनमें मेथनॉल, एसीटिक अम्ल, टोल्युइन और अमोनिया शामिल हैं।

 

इसके अलावा, पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक कच्चे माल पर शुल्क में छूट से पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तु उद्योगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इन रसायनों का उपयोग पीवीसी पाइप, पेंट, कोटिंग, इंसुलेशन सामग्री, वाहन पुर्जों और सीट फोम के निर्माण में किया जाता है।

 

दवा उद्योग में भी कई रसायनों का उपयोग होता है, जिससे दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अमोनियम नाइट्रेट पर शुल्क हटने से उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलने की संभावना है।

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