ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। हालांकि इस फैसले के बाद भी उपभोक्ताओं को फिलहाल कीमतों में राहत नहीं मिली है, जिससे आम लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए उठाया गया है। वहीं सरकार ने डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ / एविएशन टरबाइन फ्यूल पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगाया है, ताकि देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
In view of the West Asia crisis, the central excise duty on petrol and diesel for domestic consumption has been reduced by ₹10 per litre each. This will provide protection to consumers from rise in prices. Hon. PM @narendramodi has always ensured that citizens are protected from…
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) March 27, 2026
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर असर के चलते ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हुई है। यह वही मार्ग है, जिससे दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई गुजरती है। 28 फरवरी के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और यह करीब 48% बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति का सीधा असर भारत की ओएमसीस पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनियां पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठा रही हैं। यही कारण है कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दामों में तत्काल कमी नहीं दिखाई दी।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे या तो कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जाए या फिर राजस्व पर दबाव लेकर उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। सरकार ने दूसरा विकल्प चुना है।
International crude prices have gone through the roof in the last 1 month from around 70 dollars/barrel to around 122 dollars/barrel. Consequently, petrol and diesel prices for consumers have gone up all over the world. Prices have increased by around 30%-50% in South East Asian…
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) March 27, 2026
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल यह कदम तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए है, न कि सीधे तौर पर उपभोक्ता कीमतों को घटाने के लिए। ग्लोबल मार्किट की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों के रुख के आधार पर आने वाले समय में ईंधन कीमतों में बदलाव संभव माना जा रहा है।
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