अगर आप पंजाब में वाहन चलाते हैं तो अब ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना पहले से कहीं अधिक महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार ने गंभीर श्रेणी के आठ ट्रैफिक उल्लंघनों को नॉन-कंपाउंडेबल घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि अब ऐसे मामलों में मौके पर चालान भरकर मामला खत्म नहीं होगा। पुलिस चालान काटने के बाद केस सीधे अदालत भेजेगी, जहां मजिस्ट्रेट जुर्माने और सजा पर फैसला करेंगे।
नई अधिसूचना लागू होने के बाद रेड लाइट जंप करने, शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाने, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और नाबालिग से वाहन चलवाने जैसे मामलों में वाहन चालकों को अदालत की प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार निम्नलिखित आठ तरह के गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों को नॉन-कंपाउंडेबल श्रेणी में शामिल किया गया है—
- रेड लाइट जंप करना
- स्टॉप साइन की अनदेखी करना
- गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में वाहन चलाना
- खतरनाक तरीके से वाहन चलाना
- शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में ड्राइविंग
- नो-ओवरटेकिंग जोन में ओवरटेक करना
- खतरनाक या अनधिकृत ओवरटेकिंग
- जिग-जैग ड्राइविंग और नाबालिग से वाहन चलवाना
इन मामलों में अब मौके पर चालान का भुगतान कर मामला समाप्त नहीं किया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत ट्रैफिक पुलिस उल्लंघन दर्ज करने के बाद मामला संबंधित अदालत में भेजेगी। इसके बाद वाहन चालक को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होना होगा। जुर्माना, सजा या अन्य कानूनी कार्रवाई का अंतिम निर्णय अदालत करेगी।
नई अधिसूचना के तहत यदि कोई वाहन मालिक या अभिभावक नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति देता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही तीन वर्ष तक की सजा का भी प्रावधान है।
ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने भी लोगों से अपील की है कि वे नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने के लिए न दें, क्योंकि कानूनी जिम्मेदारी वाहन मालिक या अभिभावक की भी होगी।
अधिसूचना के अनुसार शराब या नशीले पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाने और खतरनाक ड्राइविंग के मामलों में अदालत अधिकतम दो वर्ष तक की सजा दे सकती है। ऐसे मामलों को भी अब मौके पर निपटाने की व्यवस्था नहीं होगी।
पंजाब सरकार ने इन गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 184, 185, 188 और 199ए के तहत नॉन-कंपाउंडेबल घोषित किया है। अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
पहले कई मामलों में वाहन चालक मौके पर चालान का भुगतान कर प्रक्रिया पूरी कर सकते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों में ऐसा संभव नहीं होगा। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में सुनवाई होगी और वहीं अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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