आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने के फैसले पर दिल्ली बीजेपी ने प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस निर्णय को लेकर पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठाए हैं।
AAP ने राज्यसभा में अपने सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को नई जिम्मेदारी दी है। इस संबंध में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर औपचारिक जानकारी दी है। पत्र में यह भी अनुरोध किया गया है कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने संसदीय दल के नेता नियुक्त करने का अधिकार है, लेकिन जिस तरह से राघव चड्ढा को पद से हटाया गया और उनके बोलने के समय को लेकर भी अनुरोध किया गया, उससे पार्टी के भीतर मतभेदों के संकेत मिलते हैं।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, आम आदमी पार्टी के नेतृत्व का यह अधिकार है कि वह अपने संसदीय दल का नेता नियुक्त करे, लेकिन जिस तरह सांसद राघव चड्ढा को न केवल राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाया गया है, बल्कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें सदन में बोलने का समय न दिया जाए, उससे स्पष्ट है कि राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के अराजक और भ्रष्ट नेतृत्व से दूरी बना ली है।
उन्होंने आगे कहा, पहले स्वाति मालीवाल और अब राघव चड्ढा, जो आम आदमी पार्टी की नींव रहे हैं, अरविंद केजरीवाल से दूर हो गए हैं। संभव है कि कुछ अन्य लोग भी आम आदमी पार्टी के दैनिक कार्यों से दूरी बना चुके हों। बेहतर होता कि अरविंद केजरीवाल नैतिक जिम्मेदारी दिखाते, लेकिन हम सभी जानते हैं कि केजरीवाल एक कमजोर नेता हैं।
आम आदमी पार्टी के नेतृत्व का यह अधिकार है कि वह अपने संसदीय दल का नेता नियुक्त करे, लेकिन जिस तरह सांसद राघव चड्ढा को न केवल राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाया गया है, बल्कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें सदन में बोलने का समय न दिया जाए, उससे…
— BJP Delhi (@BJP4Delhi) April 2, 2026
बीजेपी ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व से दूरी बना ली है। पार्टी ने यह भी कहा कि इससे पहले स्वाति मालीवाल का मामला सामने आ चुका है और अब राघव चड्ढा का नाम जुड़ने से पार्टी के भीतर असहमति की स्थिति स्पष्ट होती है।
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