उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए पार्टी लाइन से हटकर काम करने वाले तीन विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। वहीं, पांच अन्य विधायकों को अंतिम चेतावनी देते हुए ‘आखिरी मौका’ दिया गया है।
निष्कासित विधायकों में गोशाईगंज से अभय सिंह, गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह, और ऊंचाहार से मनोज कुमार पांडेय शामिल हैं। पार्टी ने इन नेताओं पर आरोप लगाया है कि इन्होंने सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दिया, साथ ही किसान, महिला, युवा और व्यापारी विरोधी नीतियों का समर्थन किया।
इसके अलावा, बीते वर्ष हुए राज्यसभा चुनाव में इन नेताओं ने क्रॉस वोटिंग कर बीजेपी उम्मीदवारों को समर्थन दिया, जिससे सपा की छवि को गहरा आघात लगा।
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन विधायकों को सुधारने के लिए 'अनुग्रह अवधि' के तहत अवसर दिया गया था, लेकिन जब कोई सकारात्मक बदलाव नहीं दिखा तो पार्टी ने यह कठोर निर्णय लिया। सपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा,
"जहां रहें, विश्वसनीय रहें। समाजवादी विचारधारा के साथ समझौता अक्षम्य है।"
अनुशासनहीनता पर होगी और भी सख्ती
सपा नेतृत्व ने यह भी संकेत दिए हैं कि पार्टी की विचारधारा और अनुशासन के खिलाफ जाने वाले अन्य नेताओं पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के दौरान आठ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था, जिसके चलते पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी को अप्रत्याशित जीत मिली थी।
इन विधायकों को मिला अंतिम मौका
फिलहाल पार्टी ने जिन पांच बागी विधायकों को अंतिम चेतावनी दी है, उनमें पूजा पाल, राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष चतुर्वेदी, और महाराजी देवी शामिल हैं। सपा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह कार्रवाई सपा के अनुशासन और विचारधारा को लेकर सख्त रुख का परिचायक है और इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि पार्टी अब संगठनात्मक अनुशासन से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।
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