होर्मुज संकट के बीच यूएई का बड़ा दांव, नई पाइपलाइन से बढ़ेगी तेल निर्यात क्षमता

ईरान-होर्मुज तनाव के बीच यूएई ने शुरू किया पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन प्रोजेक्ट, 2027 तक फुजैरा से तेल निर्यात में विस्तार संभव।
Bureau 15 May 2026, 07:37 PM 1 min read
होर्मुज संकट के बीच यूएई का बड़ा दांव, नई पाइपलाइन से बढ़ेगी तेल निर्यात क्षमता

इमेज सोर्स (एआई)

 

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर मंडरा रहे संकट के बीच संयुक्त यूएई ने अपनी एनर्जी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यूएई अब ऐसी नई पाइपलाइन परियोजना पर काम कर रहा है, जो होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए देश के पश्चिमी तट को पूर्वी तट से जोड़ेगी। इस परियोजना का उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखना और तेल निर्यात के लिए रणनीतिक विकल्प तैयार करना है।

 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण इस रूट पर अनिश्चितता बढ़ी है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई दिया है। ऐसे माहौल में यूएई की नई पाइपलाइन परियोजना को रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

यूएई की सरकारी तेल कंपनी एडीएनओसी पहले से हबशान-फुजैरा पाइपलाइन का संचालन कर रही है। वर्तमान में यह पाइपलाइन प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल तेल परिवहन क्षमता रखती है। नई परियोजना के तहत इसकी क्षमता बढ़ाकर करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाने की योजना है। इससे फुजैरा पोर्ट से तेल निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम हो जाएगी।

 

अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद ने हाल ही में कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान इस परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार, नई पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन परियोजना को वर्ष 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद यूएई सीधे फुजैरा बंदरगाह से बड़े पैमाने पर तेल निर्यात कर सकेगा।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि फुजैरा पहले से दुनिया के प्रमुख तेल स्टोरेज और बंकरिंग हब्स में शामिल है। नई पाइपलाइन के संचालन से इसकी रणनीतिक भूमिका और मजबूत होगी। ऊर्जा बाजार विश्लेषकों के मुताबिक यह परियोजना यूएई को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अधिक स्थिर और प्रभावशाली स्थिति प्रदान कर सकती है। साथ ही, क्षेत्रीय संघर्ष या समुद्री मार्गों में रुकावट की स्थिति में तेल निर्यात पर पड़ने वाले जोखिम को भी कम किया जा सकेगा।

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