>उत्तर प्रदेश की सियासत में मंगलवार का दिन बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद-विधायक आजम खान करीब 23 महीने बाद सीतापुर जेल से बाहर आ सकते हैं। लेकिन उनकी रिहाई के साथ ही सियासी गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या वह 2027 विधानसभा चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं।
>दरअसल, वर्ष 2022 में भड़काऊ भाषण मामले में उन्हें सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी खत्म हो गई थी। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के मुताबिक दोषी व्यक्ति सजा पूरी होने के छह साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य रहता है। यानी मौजूदा हालात में आजम खान 2028 तक चुनाव नहीं लड़ सकते।
>अब्दुल्ला की भी वही स्थिति
>आजम खान के बेटे और स्वार सीट से पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम भी चुनावी प्रतिबंध की जद में हैं। उनकी सदस्यता 2023 में मुरादाबाद एमपी-एमएलए कोर्ट से दो साल की सजा मिलने के बाद रद्द हुई। इस तरह उनकी चुनाव लड़ने की योग्यता भी 2029 तक समाप्त हो गई है। यानी पिता-पुत्र दोनों ही 2027 के चुनावी मैदान से बाहर हैं। आजम परिवार की उम्मीदें अब अदालत से मिलने वाले किसी संभावित स्टे पर टिकी हैं। अगर भविष्य में सजा पर रोक मिलती है तो समीकरण बदल सकते हैं, लेकिन फिलहाल सपा का यह प्रभावशाली राजनीतिक परिवार केवल रणनीतिक भूमिका तक ही सीमित रहेगा।
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