डिग्री नहीं, अब हुनर देगा रोजगार

14 Jul 2025


>आज से ठीक दस साल पहले, 15 जुलाई 2015 को जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 'स्किल इंडिया मिशन' का शुभारंभ किया था, तब शायद ही किसी ने अंदाज़ा लगाया होगा कि यह पहल भारत के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को इस कदर बदल देगी। यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि भारत के युवाओं को हाथों में हुनर, आंखों में आत्मविश्वास और जीवन में आत्मनिर्भरता देने की ऐतिहासिक शुरुआत थी।


>डिग्री से आगे बढ़कर ‘हुनर’ की ओर बढ़ा देश


>आज का भारत केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि कुशल और सक्षम युवाओं का देश बन रहा है। स्किल इंडिया मिशन ने इस बदलाव की अगुवाई की है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में लाखों युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें न सिर्फ रोज़गार दिलवाया गया, बल्कि स्वरोज़गार के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। ग्रामीण इलाकों में स्थापित स्किल सेंटर, उद्योगों की ज़रूरतों के मुताबिक तैयार पाठ्यक्रम और लगातार हो रहे रोजगार मेले – ये सब मिलकर युवाओं के भविष्य को आकार दे रहे हैं।


>आंकड़ों में दिखा बदलाव, ज़मीन पर दिखा असर


>तकनीकी शिक्षा अब सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रही। छात्र अब मशीन, तकनीक, डिज़िटल उपकरणों और आधुनिक उद्योग जगत की ज़रूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।


>सिलाई से सुपरवाइज़री तक – हर हुनर की अपनी कहानी


>यह मिशन केवल रिपोर्ट या आंकड़ों तक सीमित नहीं। यह उस गाँव की लड़की की कहानी है जो आज अपने हुनर से कपड़े सिलकर घर चला रही है, उस बेरोज़गार युवक की कहानी है जो अब एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइज़र बन चुका है। यह परिवर्तन सिर्फ व्यक्ति का नहीं, पूरे देश की सोच का बदलाव है।


>विकसित भारत @2047 की नींव


>जब प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 का सपना देश के सामने रखा, तब उस सपने की सबसे ठोस नींव यही मिशन बनकर उभरा। यह सिर्फ युवाओं को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण का भागीदार बनाने का मिशन है।


>कौशल ही असली पहचान है, और स्किल इंडिया ने यह साबित कर दिया है।