किसी पुराने हत्या मामले की फाइल वर्षों तक बंद पड़ी रहे और फिर चार दशक बाद अचानक उसके एक अहम आरोपी तक पुलिस पहुंच जाए, तो उस पूरी प्रक्रिया के पीछे सिर्फ गिरफ्तारी की तारीख नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली तलाश, पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई सूचनाओं की एक पूरी श्रृंखला होती है। दिल्ली के जनकपुरी थाने में दर्ज 1984 का एक हत्या मामला भी ऐसी ही लंबी जांच का हिस्सा रहा है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज ने इस मामले में 65 वर्षीय नत्थू उर्फ नत्थूलाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, वह 42 साल से अधिक समय से गिरफ्तारी से बच रहा था। आरोपी को 18 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में उसके गांव के पास उस समय पकड़ा गया, जब वह फर्रुखाबाद की ओर जा रहा था।
मामला 22 और 23 मई 1984 की दरम्यानी रात का है। पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी स्थित जिला पार्क में एक व्यक्ति का शव मिला था। उसके शरीर पर चाकू से कई वार के निशान थे। बाद में शव की पहचान उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के निवासी अशोक कुमार के रूप में हुई। यहीं से शुरू हुई वह जांच, जो एक आरोपी तक पहुंचने में दशकों लंबी हो गई।
जनकपुरी थाने में प्राथमिकी संख्या 252/1984 के तहत 23 मई 1984 को हत्या का मामला दर्ज किया गया था। भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दर्ज इस मामले की जांच में पुलिस को भभूति प्रसाद की भूमिका के बारे में जानकारी मिली।
पुलिस के अनुसार, भभूति प्रसाद को गिरफ्तार किया गया और वारदात में इस्तेमाल चाकू भी बरामद किया गया। लेकिन जांच की एक अहम कड़ी अधूरी रह गई। उसका सह-आरोपी नत्थू उर्फ नत्थूलाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। इसके बाद इस मामले में दो रास्ते अलग हो गए—एक आरोपी गिरफ्तार हुआ, दूसरा फरार रहा।
नत्थू की तलाश जारी रही, लेकिन समय बीतता गया। 1980 के दशक का यह मामला धीरे-धीरे उन पुराने मामलों की श्रेणी में पहुंच गया जिनमें आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बनी हुई थी।
1984 में हत्या, 2026 में गिरफ्तारी; 42 साल बाद पकड़ा गया फरार आरोपी
क्राइम ब्रांच के सामने चुनौती यह थी कि चार दशक से अधिक समय बीतने के बाद आरोपी कहां है, उसकी पहचान और गतिविधियों की मौजूदा जानकारी कितनी विश्वसनीय है और इतने पुराने रिकॉर्ड से उसकी वर्तमान मौजूदगी तक कैसे पहुंचा जाए।
पुलिस के अनुसार, इस गिरफ्तारी को एक विशेष अभियान के रूप में लिया गया। पुराने केस रिकॉर्ड का दोबारा अध्ययन किया गया। उपलब्ध जानकारियों को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया और आरोपी के संभावित ठिकानों की तलाश के लिए उत्तर प्रदेश के सीतापुर और हरदोई जिलों में कई महीनों तक जमीनी स्तर पर जानकारी जुटाई गई। इस अभियान की सबसे अहम कड़ी हरदोई का पाली क्षेत्र बना।
पुलिस को वहां से जानकारी मिली कि आरोपी जीवित है और कभी-कभी अपने पैतृक गांव आता है। इसके बाद पुलिस ने स्थानीय स्तर पर सत्यापन शुरू किया। पुराने रिकॉर्ड में दर्ज विवरणों को मौजूदा सूचनाओं से मिलाया गया और उसके आने-जाने के संभावित रास्तों पर नजर रखी गई।
पुलिस के मुताबिक, 17 अगस्त 2026 को गांव में एक संदिग्ध व्यक्ति के देखे जाने की जानकारी सामने आई। उसका हुलिया उस विवरण से मेल खाता था, जिसे टीम ने अपने पुराने रिकॉर्ड और जांच से तैयार किया था।
इसके बाद पुलिस ने तत्काल गिरफ्तारी के बजाय निगरानी के जरिए उसकी पहचान और गतिविधियों की पुष्टि की। इस दौरान जुटाई गई स्थानीय जानकारी को पहले से उपलब्ध तथ्यों से मिलाया गया।
अगले दिन, 18 अगस्त को टीम ने आरोपी को उसके गांव के आसपास ट्रेस कर लिया। पुलिस के अनुसार, नत्थू उस समय गांव से फर्रुखाबाद की ओर जा रहा था। इसी दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया। चार दशक से अधिक समय से फरार इस आरोपी की गिरफ्तारी के साथ 1984 में शुरू हुई जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी पुलिस के हाथ लगी।
इस अभियान के लिए क्राइम ब्रांच ने एक समर्पित टीम तैयार की थी। पुलिस के अनुसार, टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर सुनील कुमार कलखांडे ने किया। उनके साथ उपनिरीक्षक देवेंद्र अंतिल, हेड कांस्टेबल विजय सिंह यादव, समंदर, जय सिंह, परवीन कुमार, राहुल, विनोद, अंकित और अनूप शामिल रहे। कार्रवाई सहायक पुलिस आयुक्त सेंट्रल रेंज सतेंद्र मोहन की निगरानी और पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम के दिशा-निर्देश में की गई।
टीम ने पुराने मामले से जुड़ी जानकारी को फिर से खंगाला और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, सीतापुर और हरदोई में कई महीनों तक क्षेत्रीय सत्यापन और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया चली। इसी दौरान आरोपी की मौजूदा मौजूदगी के बारे में महत्वपूर्ण इनपुट मिले। पुराने मामले में उपलब्ध जानकारी और वर्तमान समय की जमीनी सूचना को जोड़ना इस कार्रवाई का अहम हिस्सा रहा।
पुलिस की जांच के अनुसार, नत्थू उर्फ नत्थूलाल और भभूति प्रसाद दोस्त थे। अशोक कुमार और भभूति प्रसाद भी एक ही गांव के निवासी बताए गए हैं। जांच में यह बात सामने आई कि अशोक कुमार ने भभूति प्रसाद की पत्नी की ओर अनुचित व्यवहार किया था। इसको लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था।
पुलिस के मुताबिक, वारदात वाली रात नत्थू और भभूति प्रसाद ने एक पार्क में साथ शराब पी थी। इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर साझा इरादे से अशोक कुमार की हत्या की। यह विवरण पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों पर आधारित है।
नत्थू की लंबी फरारी के दौरान उसकी जिंदगी के बारे में पुलिस ने जो जानकारी जुटाई, उसके अनुसार वह उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थानों की थोक सब्जी मंडियों में काम करता रहा। पुलिस के मुताबिक, उसने इस दौरान खुद को लो प्रोफाइल में रखा और सार्वजनिक स्तर पर ज्यादा संपर्क नहीं बनाया। उसने शादी नहीं की और अकेले रहता रहा।
पुराने मामले में आरोपी होने के बावजूद इतने लंबे समय तक उसकी मौजूदगी की स्पष्ट जानकारी पुलिस को नहीं मिल सकी। उसकी गिरफ्तारी तब संभव हुई जब हरदोई में उसके कभी-कभार आने की स्थानीय सूचना को सत्यापित किया गया और उसके बाद निगरानी के जरिए उसकी गतिविधियों की पुष्टि हुई।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नत्थू उर्फ नत्थूलाल की पहले की संलिप्तता का एक अन्य मामला भी दर्ज है। फर्रुखाबाद के कोतवाली थाने में प्राथमिकी संख्या 1790/2005 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 364 में मामला दर्ज किया गया था।
यह जानकारी पुलिस द्वारा आरोपी के पूर्व रिकॉर्ड के संबंध में दी गई है।

1984 में दर्ज यह हत्या का मामला अब उस बिंदु पर पहुंचा है जहां चार दशक से अधिक समय से फरार चल रहे सह-आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी तक पहुंचने के लिए क्राइम ब्रांच ने पुराने केस रिकॉर्ड, स्थानीय सूचनाओं और कई महीनों की जमीनी पड़ताल को जोड़कर कार्रवाई की।
मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी और हथियार की बरामदगी पहले ही हो चुकी थी, जबकि नत्थू उर्फ नत्थूलाल गिरफ्तारी से बाहर रहा था। अब 18 अगस्त 2026 को उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया इसी मामले के रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ेगी।