लखनऊ, शनिवार। उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर राजधानी लखनऊ में सामने आया। नियुक्ति और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शनिवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने आवास का घेराव करते हुए नारेबाजी की और अपनी लंबित मांगों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रदर्शन करीब आधे घंटे तक चला। इस दौरान पुलिस ने अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। पुलिस ने बाद में स्थिति को नियंत्रित किया। 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति और आरक्षण संबंधी मुद्दे उठाते रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़ी अनियमितताओं के कारण कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए।
अभ्यर्थियों की मांग है कि संबंधित आदेशों का अनुपालन किया जाए और उन पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए, जिन्हें उनके अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान न्याय नहीं मिल सका। इसी मांग को लेकर पिछले दिनों लखनऊ के इको गार्डन समेत अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन किए जाने की बात सामने आई है। शनिवार को अभ्यर्थियों ने अपना प्रदर्शन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास तक पहुंचाया।
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शनिवार को प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी डिप्टी सीएम आवास के बाहर पहुंचे। यहां उन्होंने सरकार से अपनी मांगों पर कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति से जुड़े मामले के समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन के बजाय नियुक्ति को लेकर ठोस कार्रवाई की जरूरत है। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने भर्ती से जुड़े आरक्षण के मुद्दे और नियुक्ति से वंचित रह गए अभ्यर्थियों की मांग को प्रमुखता से उठाया।
डिप्टी सीएम आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शन कर रहे कुछ अभ्यर्थियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक भी हुई, जिससे कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया और स्थिति को संभाला। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे।
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68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा आंदोलन केवल शनिवार के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से लखनऊ के इको गार्डन सहित विभिन्न स्थानों पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर उठे सवालों के कारण कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए। इसी आधार पर वे संबंधित आदेशों के अनुपालन और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की ओर से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े आदेशों के अनुपालन की मांग भी उठाई जा रही है।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांग नियुक्ति से जुड़ी है। उनका कहना है कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े मामलों के कारण जिन अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी, उनके मामले में संबंधित आदेशों का अनुपालन किया जाए। अभ्यर्थी पात्रता के आधार पर वंचित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस मामले में लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा की जा रही है। उनकी मांगों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरक्षण संबंधी मामलों का समाधान और संबंधित आदेशों को लागू करना शामिल है।
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला लंबे समय से अभ्यर्थियों के आंदोलन से जुड़ा रहा है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के अनुसार, वे अपनी मांगों को लेकर सरकारी कार्यालयों और मंत्रियों के आवासों तक पहुंचकर अपनी बात रखते रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने कई स्तरों पर अपनी मांगें रखी हैं। इसके बावजूद नियुक्ति से जुड़े मामले का समाधान नहीं होने के कारण उन्होंने प्रदर्शन जारी रखा है। शनिवार को डिप्टी सीएम आवास का घेराव भी इसी क्रम में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से लंबित मांगों पर निर्णय लेने की मांग दोहराई।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। अभ्यर्थियों ने विशेष रूप से नियुक्ति से वंचित पात्र अभ्यर्थियों को न्याय देने और संबंधित आदेशों के अनुपालन की मांग उठाई है। शनिवार के प्रदर्शन के दौरान करीब आधे घंटे तक नारेबाजी हुई। पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के दौरान धक्का-मुक्की और नोकझोंक भी हुई।