>उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण और पर्यावरण अनुकूल कदम उठाते हुए राज्य के पशुपालन विभाग की सभी इमारतों में गोबर आधारित जैविक पेंट के उपयोग का निर्णय लिया है। यह निर्देश प्रदेश के पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक में दिया। यह पहल न केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी दूरगामी प्रभाव डालने वाली साबित हो सकती है।
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते रविवार को हुई बैठक में सभी सरकारी भवनों में गोबर आधारित पेंट के उपयोग की संभावना तलाशने और इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए थे, ताकि बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इसी क्रम में पशुपालन विभाग ने सबसे पहले पहल करते हुए अपने सभी जिला और मुख्यालय कार्यालयों में इस पेंट का उपयोग अनिवार्य किया है।
>यह निर्णय जहां गोबर के उत्पादक उपयोग को बढ़ावा देगा, वहीं इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलेगा। shelter homes में जमा हो रहा गोबर अब बेकार नहीं जाएगा, बल्कि उससे पेंट, जैविक खाद, व अन्य उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकेंगे। इससे न केवल पशु आश्रयों को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
>बदायूं जिले के मॉडल को आधार बनाकर सभी जनपदों में गोबर पेंट उत्पादन इकाइयों की स्थापना की योजना बनाई जा रही है। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन सकता है।
>पशुपालन मंत्री ने बैठक में यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी गाय आश्रय में भूखी या प्यासी न रहे। चारे, पानी, बिजली, दवाइयों और देखभाल के समुचित प्रबंध के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। साथ ही सभी गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया को भी तेज करने के आदेश दिए गए हैं। बेहतर कार्य करने वाली गौशालाओं को पुरस्कार दिए जाएंगे जिससे प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता में सुधार होगा।
>दूध उत्पादन, नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान जैसे कार्यों की सफलता सीधे पशुओं के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है, इसलिए गुणवत्तापूर्ण दवाओं और टीकों की उपलब्धता को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
>यह भी उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राज्य में 7,697 गौशालाओं में लगभग 12.5 लाख बेसहारा पशुओं को आश्रय दिया गया है। इनमें से 1.15 लाख पशुओं को 1.11 लाख लाभार्थियों को सौंपा जा चुका है, और हज़ारों पशुपालकों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
>सरकार द्वारा पशुपालन और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की यह पहल वास्तव में एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है—जहां पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास, पशु कल्याण और प्राकृतिक कृषि को एकीकृत रूप में देखा जा रहा है। यदि इस योजना को कुशलता से लागू किया जाए तो यह न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।