राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं से मिले चंदे और तीर्थ क्षेत्र के आसपास हुई जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच रविवार को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक अलग तरह की तस्वीर देखने को मिली। हाथों में कटोरे, विरोध के पोस्टर और ₹420 का डिमांड ड्राफ्ट—इन्हीं प्रतीकों के जरिए आम आदमी पार्टी ने प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर प्रतीकात्मक भिक्षाटन कार्यक्रम आयोजित किया। इसके बाद ₹420 का डिमांड ड्राफ्ट तैयार कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को भेजा गया।इस विरोध कार्यक्रम का आयोजन राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह के आह्वान पर किया गया था।
राजधानी लखनऊ के स्वास्थ्य भवन चौराहे पर आयोजित प्रदर्शन में कार्यकर्ता कटोरे और तख्तियां लेकर पहुंचे। इसी तरह वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, बाराबंकी, झांसी, ललितपुर, मिर्जापुर, मथुरा, आगरा, आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, अयोध्या, बहराइच, बागपत और जालौन समेत कई जिलों में भी विरोध प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न नारे लगाए और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग दोहराई।
पार्टी नेताओं का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं ने दान दिया था और इस धन के उपयोग को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ऑटो विंग के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह सलूजा ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जिला महासचिव ज्ञान सिंह कुशवाहा ने कहा कि पार्टी नेतृत्व द्वारा कुछ जमीन खरीद सौदों और वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जमीनों की खरीद वास्तविक मूल्य से अधिक कीमत पर की गई, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका पैदा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि दस्तावेज सामने आने के बाद भी अब तक जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
यह विरोध कार्यक्रम केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा। पार्टी के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में एक साथ अभियान चलाकर पूरे प्रकरण की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े संस्थानों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की पारदर्शी जांच जनविश्वास के लिए आवश्यक है।