समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों के बीच अब उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की रामपुर में गांधी समाधि के पास स्थित करीब 10 हजार गज जमीन का मामला भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि इस जमीन की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से 19 अगस्त को की गई छापेमारी के दौरान कब्जे में लिए गए दस्तावेजों में शामिल हैं।
हालांकि, इस जमीन को लेकर ईडी की ओर से अलग से किसी कार्रवाई, आरोप या जांच की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। जमीन से जुड़े मामले में पहले प्रशासनिक जांच और प्राथमिकी की कार्रवाई हो चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गांधी समाधि के पास स्थित जमीन की खरीद अब्दुल्ला आजम ने वर्ष 2022 में अपने करीबी बताए जाने वाले अनवार और सालिम से की थी। उस समय आजम खान जेल में थे।
जमीन की खरीद को लेकर उसी समय सवाल उठाए गए थे। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने प्रशासन से शिकायत करते हुए सरकारी जमीन की रजिस्ट्री किए जाने का आरोप लगाया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच में जमीन कोसी नदी के डूब क्षेत्र में पाए जाने की बात सामने आई। आरोप लगाया गया कि डूब क्षेत्र की जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।
जानकारी के मुताबिक, अब्दुल्ला आजम के नाम इस जमीन की रजिस्ट्री तीन अलग-अलग चरणों में हुई थी।
- 21 फरवरी 2022: 0.9110 हेक्टेयर जमीन
- 4 अप्रैल 2022: 0.304 हेक्टेयर जमीन
- 8 अप्रैल 2022: 0.304 हेक्टेयर जमीन
इस तरह जमीन की खरीद और रजिस्ट्री अलग-अलग तारीखों में पूरी की गई थी। स्थानीय स्तर पर जमीन की प्रकृति और रजिस्ट्री को लेकर उठाई गई शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच की गई।
जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े आरोपों के मामले में 19 जनवरी 2024 को रामपुर की शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह प्राथमिकी लेखपाल संजय गंगवार की ओर से दर्ज कराई गई थी। इसमें अब्दुल्ला आजम, अनवार, सालिम और अब्दुल्ला परवेज के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। मामले में जमीन की रजिस्ट्री, उसकी प्रकृति और उससे जुड़े दस्तावेज जांच का हिस्सा रहे हैं।
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गांधी समाधि के पास स्थित इस जमीन को स्थानीय स्तर पर बेहद बेशकीमती बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में जमीन का बाजार भाव करीब एक लाख रुपये प्रति गज बताया गया है। जमीन की खरीद के दौरान स्टांप चोरी के आरोप भी लगाए गए थे। इन आरोपों के बाद प्रशासन की ओर से एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, स्टांप से जुड़े आरोप और प्रशासनिक कार्रवाई जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े पुराने विवाद का हिस्सा हैं। इन्हें ईडी की ओर से इस जमीन पर की गई किसी अलग कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता।
19 अगस्त को ईडी ने जौहर विश्वविद्यालय के साथ शौकत रोड स्थित एएंडएस इंटरप्राइजेज पर भी छापेमारी की थी। यह फर्म अनवार और सालिम के नाम से संचालित बताई जाती है। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ईडी की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। इनमें गांधी समाधि के पास स्थित जमीन की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज भी शामिल बताए जा रहे हैं।
यही वजह है कि अब्दुल्ला आजम के नाम दर्ज इस जमीन का मामला ईडी की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ईडी की ओर से इस जमीन को लेकर कोई अलग मामला दर्ज किए जाने या किसी व्यक्ति पर इस संबंध में नया आरोप लगाए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर पहले से ही कई आरोप सामने आते रहे हैं। इनमें जमीन की प्रकृति, रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क से जुड़े आरोप शामिल हैं। अब ईडी की छापेमारी में जमीन से संबंधित दस्तावेज मिलने की जानकारी के बाद जमीन की खरीद में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच की चर्चा तेज हुई है। इसी क्रम में जमीन की खरीद में काले धन के इस्तेमाल की आशंका की भी चर्चा की जा रही है। हालांकि, ऐसी आशंका को लेकर ईडी की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
इस मामले में अब्दुल्ला आजम समेत सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर बताए गए हैं। जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े आरोपों और प्राथमिकी की कानूनी प्रक्रिया अलग स्तर पर चल रही है। ईडी की 19 अगस्त की छापेमारी के बाद जमीन से संबंधित दस्तावेजों के मिलने की जानकारी सामने आई है, लेकिन इन दस्तावेजों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।