महात्मा गांधी के विचारों को याद करने और उन्हें दैनिक जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से अम्बेडकरनगर के अकबरपुर में एक विशेष आयोजन किया गया। गांधी आश्रम परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में चरखा, खादी और स्वदेशी की परंपरा को केंद्र में रखा गया। आयोजन के दौरान लोगों ने सहभागिता करते हुए गांधी जी के स्वावलंबन और श्रम के सम्मान से जुड़े विचारों को याद किया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के उपलक्ष्य में अकबरपुर स्थित गांधी आश्रम में अखंड महा सूत यज्ञ का आयोजन किया गया। इस दौरान लगातार 24 घंटे तक चरखा चलाकर सूत काता गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने चरखा चलाकर महात्मा गांधी के विचारों को स्मरण किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य खादी, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की भावना को जन-जन तक पहुंचाना रहा। गांधी आश्रम परिसर में हुए इस कार्यक्रम में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चरखे के माध्यम से सूत कातने की प्रक्रिया को गांधी जी के विचारों और उनके जीवन दर्शन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
अखंड महा सूत यज्ञ के दौरान 24 घंटे तक सूत कातने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें चरखे को केंद्र में रखते हुए स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। आयोजन के माध्यम से लोगों को खादी अपनाने और स्थानीय स्तर पर तैयार स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। चरखा महात्मा गांधी के विचारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। गांधी जी ने इसे स्वावलंबन, श्रम और स्वदेशी की भावना से जोड़ा था। अकबरपुर में आयोजित सूत यज्ञ में भी इन्हीं विचारों को प्रमुखता दी गई।
आयोजकों ने कहा कि चरखा गांधी जी के स्वावलंबन और श्रम के सम्मान का प्रतीक है। अखंड महा सूत यज्ञ का उद्देश्य गांधीवादी विचारों, खादी एवं स्वदेशी की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। आयोजन में इस बात पर जोर दिया गया कि गांधी जी के विचारों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें जीवन में अपनाने का प्रयास भी किया जाए। कार्यक्रम के माध्यम से खादी के उपयोग, स्वदेशी वस्तुओं के प्रति जागरूकता और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
अखंड महा सूत यज्ञ में खादी और स्वदेशी के महत्व को प्रमुखता दी गई। चरखे पर सूत कातने की गतिविधि के जरिए खादी निर्माण से जुड़ी परंपरा को याद किया गया। खादी गांधीवादी विचारधारा से जुड़ी रही है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान चरखा और खादी स्वदेशी तथा आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में सामने आए थे। अकबरपुर में आयोजित कार्यक्रम में भी खादी अपनाने और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का संदेश दिया गया। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का एक उद्देश्य युवा पीढ़ी को गांधीवादी विचारों से जोड़ना भी है।
कार्यक्रम के आयोजकों ने गांधीवादी विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने को आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बताया। इसके तहत चरखा चलाने, सूत कातने और खादी के महत्व को समझाने के माध्यम से गांधी जी के स्वावलंबन, श्रम और स्वदेशी संबंधी संदेश को सामने रखा गया। गांधी आश्रम परिसर में आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने गांधी जी के आदर्शों और उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प भी लिया।
अखंड महा सूत यज्ञ के दौरान गांधी जी के आदर्शों को याद किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने उनके विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। 24 घंटे तक चले इस आयोजन में चरखा चलाकर सूत कातने के साथ खादी, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।