उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में ई-पंजीकरण और रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों को निजी कंपनियों को सौंपे जाने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को अकबरपुर तहसील में दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर और अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
उत्तर प्रदेश रजिस्ट्रीकरण दस्तावेज लेखक संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर और अधिवक्ता कार्य बहिष्कार करते हुए धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने ई-पंजीकरण व्यवस्था से जुड़े कार्यों के निजीकरण का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई।
धरने में शामिल दस्तावेज लेखक विनोद तिवारी ने कहा कि यदि ई-पंजीकरण और रजिस्ट्री का कार्य निजी कंपनियों को सौंपा गया तो प्रदेश भर में हजारों दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों और अधिवक्ताओं की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है और उन्हें कई प्रकार की व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से रजिस्ट्री संबंधी कार्य अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडरों के माध्यम से संचालित होते रहे हैं। ऐसे में इन सेवाओं को निजी कंपनियों के हवाले करने से पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ई-पंजीकरण व्यवस्था में सुधार किया जाए, लेकिन रजिस्ट्री से जुड़े कार्यों का निजीकरण नहीं किया जाए।
धरने पर बैठे लोगों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्रस्तावित निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन रजिस्ट्रार अकबरपुर अभिषेक सिंह को सौंपकर इस प्रस्ताव पर कार्रवाई की मांग की। कार्य बहिष्कार के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।
प्रदर्शन में अभय श्रीवास्तव, आदर्श श्रीवास्तव, गुड्डू श्रीवास्तव, घिराऊलाल, विजयसेन, चिंतामणि, ओमप्रकाश चौबे, राम सिंह, गिरजाशंकर गुप्ता, मायाराम यादव, प्रदीप शुक्ला, पंकज, रुस्तम, शुभम तिवारी, आशुतोष विश्वकर्मा, विवेक सिंह, शशिकांत तिवारी, अभय भूषण दूबे, वीजेंद्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।