अखिलेश यादव की मस्जिद बैठक पर साधु-संतों का फूटा गुस्सा

24 Jul 2025


>दिल्ली की एक मस्जिद में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की पार्टी नेताओं के साथ हुई बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही, अयोध्या के साधु-संतों में नाराजगी की लहर दौड़ गई है। इस बैठक को लेकर रामनगरी के प्रमुख संतों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ और ‘राष्ट्रविरोधी सोच का प्रतीक’ बताया है।

रामपुर सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी जी के दिल्ली आवास पर…. pic.twitter.com/7UlvPQx8Gt

— Dharmendra Yadav (@MPDharmendraYdv) July 22, 2025


>निर्मोही अखाड़े के महंत सीताराम दास महाराज ने इस मसले पर दो टूक कहा, “अब इसमें कोई संदेह नहीं कि अखिलेश यादव के डीएनए में ही दोष है। जो व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को इस प्रकार ठेस पहुंचाए, उससे देश और धर्म की रक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती।”


>हनुमानगढ़ी पीठ के संत देवेशाचार्य महाराज ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मस्जिद में इस तरह की राजनीतिक बैठक करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सपा जैसी पार्टी को धार्मिक स्थलों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”


>श्री हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने तो सपा की इस गतिविधि को राष्ट्रविरोधी मानसिकता तक करार दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि “समाजवादी पार्टी हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है। धर्म और राष्ट्र दोनों के विरोध में ऐसी गतिविधियाँ सपा की पुरानी आदत है।”


>संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा स्थगित हो जाने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दिल्ली स्थित एक मस्जिद में पहुंचे, जहां रामपुर से सांसद मोहिबुल्लाह मदनी का निवास है।


>उनके साथ मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव, फिरोजाबाद के अक्षय यादव, बदायूं से आदित्य यादव, आजमगढ़ से धर्मेंद्र यादव, संभल से जियाउर्रहमान बर्क, कैराना की इकरा हसन और सपा नेता राजीव राय सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।


>इस बैठक की तस्वीरें जैसे ही वायरल हुईं, बीजेपी ने सपा पर एक बार फिर ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का आरोप जड़ दिया। वहीं, अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा, “आस्था जोड़ती है, नफ़रत तोड़ती है — बीजेपी को यही बात परेशान करती है।”