ममता बनर्जी से मुलाकात से पहले अखिलेश यादव के आरोपों से गरमाई यूपी की राजनीति, बोले- 2022 में ही देख लिया था सब

06 May 2026

 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से संभावित मुलाकात से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों और हालिया उपचुनावों को लेकर भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह लगातार चर्चा का विषय रहा है कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतती है या उन्हें “मैनेज” करती है।

 

प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में “करो या मरो” का नारा दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं ने परिणाम आने तक मजबूती के साथ मोर्चा संभाले रखा। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ताओं और नेताओं की सतर्कता के कारण भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका। सपा प्रमुख ने उन कार्यकर्ताओं का भी जिक्र किया जो कथित दबाव और भय के माहौल के बावजूद मतदान केंद्रों पर डटे रहे।

 

सपा प्रमुख ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई प्रत्याशी बेहद कम अंतर से चुनाव हारे और पार्टी को चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल विपक्षी समर्थकों को मतदान प्रक्रिया से दूर रखने के लिए किया गया। अखिलेश यादव के अनुसार, कई स्थानों पर उनके समर्थकों को मतदान केंद्रों से हटाया गया, जिससे चुनाव प्रभावित हुआ।

 

उन्होंने चंडीगढ़ मेयर चुनाव का उदाहरण देते हुए चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अयोध्या सीट पर भाजपा की हार राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश थी, जिसके बाद उपचुनावों में सत्ता पक्ष ने हर संभव प्रयास किया। उन्होंने मिल्कीपुर उपचुनाव का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां विशेष अधिकारियों की तैनाती की गई थी और कुछ अधिकारियों के खिलाफ पहले जांच भी हो चुकी है।

 

सपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या क्षेत्र में राजनीतिक लाभ के लिए मामलों को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिशें हुईं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता और ममता बनर्जी ने जिस तरह की परिस्थितियों का सामना किया, वैसा ही अनुभव समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश में देखा था।

 

अखिलेश यादव ने भाजपा के सहयोगी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक “बहुस्तरीय चुनावी माफिया” काम कर रहा है, जिसमें सत्ता पक्ष के सहयोगी दल भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि पीडीए के हर कार्यकर्ता को कमजोर करने की कोशिश की गई, जबकि विपक्षी उम्मीदवार बेहद कम अंतर से चुनाव हारे।

 

प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने दावा किया कि कई उपचुनावों में उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर लोग रिवॉल्वर के सामने खड़े रहे और पार्टी ने ऐसे परिवारों की मदद भी की। हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।