शिक्षा से लेकर पुलिस तक, अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा

03 Oct 2026

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर बयानबाजी जारी है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य की कई व्यवस्थाओं को लेकर योगी सरकार से सवाल किए हैं।

अखिलेश यादव ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से लेकर मतदाता सूची, पुलिस प्रशासन, किसानों की आर्थिक स्थिति और एम्बुलेंस सेवाओं तक के मुद्दे उठाए। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और जवाबदेही की जरूरत बताई। इस दौरान उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की संगठनात्मक तैयारी और नए नेताओं के पार्टी में शामिल होने से जुड़ी जानकारी भी साझा की।

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा और परीक्षाओं से जुड़ी व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा, "इस सरकार में शिक्षा और परीक्षा की व्यवस्था ध्वस्त हुई है।" उनके बयान में शिक्षा व्यवस्था के संचालन, परीक्षाओं के आयोजन और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उन्होंने किसी विशेष परीक्षा, संस्थान या प्रशासनिक आदेश का विस्तृत उल्लेख नहीं किया। शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं का विषय उत्तर प्रदेश में युवाओं और अभ्यर्थियों से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे में अखिलेश यादव की टिप्पणी को आगामी चुनाव से पहले शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक चर्चा के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

 

अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। सपा अध्यक्ष ने कहा, "जो टीचर ही नहीं है, उसका भी वोट बना दिया गया।" इस बयान के जरिए उन्होंने मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया और उसकी जांच को लेकर सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि मतदाता सूची तैयार करने में निष्पक्षता का पालन नहीं किया जा रहा है। मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलत प्रविष्टियों को सुधारने और पात्र मतदाताओं का नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शामिल होती है। अखिलेश यादव की ओर से उठाया गया मुद्दा इसी प्रक्रिया की पारदर्शिता से संबंधित है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित मतदाता, विधानसभा क्षेत्र या मतदाता सूची की विशिष्ट प्रविष्टि का विवरण नहीं दिया गया है।

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पुलिस व्यवस्था की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट खुद कह रहा है कि यहां की पुलिस बर्बाद हो चुकी है।" सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को मुद्दा बनाया। हालांकि, इस टिप्पणी के समर्थन में किसी विशेष न्यायिक आदेश, मामले या सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। पुलिस व्यवस्था राज्य सरकार के प्रशासनिक दायित्वों में शामिल है। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नागरिकों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही जैसे विषय इसी से जुड़े हैं। अखिलेश यादव ने इन मुद्दों को उठाकर राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल किए।

किसानों की आर्थिक स्थिति और कर्ज राहत को लेकर भी अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किया। उन्होंने बड़े उद्योगपतियों के कर्ज और किसानों को मिलने वाली राहत के बीच तुलना करते हुए कहा, "जब बड़े-बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ हो सकता है तो किसानों को राहत क्यों नहीं।" उनकी टिप्पणी किसानों के कर्ज और आर्थिक सहायता से संबंधित थी। सपा अध्यक्ष ने किसानों को राहत देने के सवाल को सरकार के सामने रखा। कृषि क्षेत्र में कर्ज, फसल की लागत, कृषि आय और आर्थिक सहायता जैसे विषय किसानों की आजीविका से सीधे जुड़े होते हैं। अखिलेश यादव ने अपने बयान में किसानों को राहत देने की मांग को प्रमुखता दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष किसान कर्ज माफी योजना, लाभार्थियों की संख्या या प्रस्तावित राहत राशि का उल्लेख नहीं है।

अखिलेश यादव ने प्रदेश की एम्बुलेंस सेवाओं को लेकर भी योगी सरकार की आलोचना की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एम्बुलेंस व्यवस्था को सरकार के सामने उठाए गए मुद्दों में शामिल किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष जिले, एम्बुलेंस सेवा की घटना, प्रतिक्रिया समय या मरीज से संबंधित मामले का विवरण नहीं दिया गया है। एम्बुलेंस सेवाएं आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में इनकी भूमिका होती है। सपा अध्यक्ष ने इस व्यवस्था को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के साथ अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी की चुनावी तैयारियों से जुड़ा लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य दिया है। इससे पहले 20 सितंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद अखिलेश यादव ने इस रणनीति की जानकारी दी थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतदाताओं के घरों तक पहुंचने और उनकी समस्याओं को समझने की बात कही थी। पार्टी की रणनीति में बूथ स्तर पर संपर्क और मतदाताओं से संवाद को शामिल किया गया है। यह 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य समाजवादी पार्टी का घोषित संगठनात्मक और चुनावी लक्ष्य है। इसे चुनाव परिणाम या वास्तविक मतदाता समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक गतिविधियों के बीच पूर्व एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल और डॉ. संजय त्रिपाठी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं का पार्टी में स्वागत किया। इस घटनाक्रम को आगामी विधान परिषद चुनाव से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. आकाश अग्रवाल आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और डॉ. संजय त्रिपाठी गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े हैं। 3 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों में समाजवादी पार्टी की ओर से दोनों नेताओं को संबंधित शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस घटनाक्रम के साथ पार्टी ने अपने संगठन और विधान परिषद चुनाव से जुड़े राजनीतिक समीकरणों में बदलाव किया है।