एक-दो मामलों में किसी को गुंडा नहीं कहा जा सकता - इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

23 Apr 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रशासनिक शक्तियों की सीमा तय करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को गुंडा या आदतन अपराधी घोषित नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ द्वारा सुनवाई के दौरान की गई। मामला बुलंदशहर निवासी सतेंद्र की याचिका से जुड़ा था, जिसमें छह महीने के जिला बदर आदेश को चुनौती दी गई थी। आदेश बुलंदशहर के एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) द्वारा पारित किया गया था, जिसे मेरठ आयुक्त ने भी बरकरार रखा था। प्रशासन ने दो आपराधिक मामलों के आधार पर याची को ‘आदतन अपराधी’ बताते हुए समाज के लिए खतरा करार दिया था।

 

मामले में अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल एक या दो मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित करना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में व्यक्ति और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचती है। प्रशासन को कठोर कार्रवाई के लिए ठोस और निरंतर आपराधिक गतिविधियों के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। 

 

कोर्ट ने पाया कि प्रशासन द्वारा पेश किए गए तथ्य और दलीलें कानूनी मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी साबित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक है कि वह नियमित रूप से आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दो मामलों के बीच लंबा अंतराल हो, तो ‘आदतन अपराधी’ का आधार और कमजोर हो जाता है। निरंतर और व्यवस्थित आपराधिक गतिविधियों के ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।