अम्बेडकरनगर में सब्जियों के बढ़े भाव से घरेलू रसोई का बजट प्रभावित हुआ है। बारिश के कारण बाजार में सब्जियों की आवक कम होने से कई प्रमुख सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश हरी सब्जियां ₹50 रुपये किलो से नीचे नहीं मिल रही हैं। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली धनिया, हरी मिर्च, अदरक और लहसुन जैसी चीजों के दाम भी बढ़े हैं।
स्थानीय बाजार में धनिया का भाव ₹200 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं लहसुन और अदरक ₹150 रुपये किलो, हरी मिर्च ₹120 रुपये किलो और शिमला मिर्च ₹150 रुपये किलो तक बिक रही है। प्याज का भाव भी ₹50 से ₹60 रुपये किलो के बीच बताया गया है।
बाजार में सब्जियों के दाम बढ़ने का प्रमुख कारण बारिश के चलते आवक प्रभावित होना बताया गया है। जब बाजार में सब्जियों की उपलब्धता कम होती है, तो मौजूदा बिक्री पर उसी का असर दिखाई देता है। अम्बेडकरनगर के बाजार में अभी कई हरी सब्जियां ₹50 रुपये किलो या उससे अधिक के भाव पर बिक रही हैं।
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रोजाना की रसोई में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के साथ-साथ मसाले के तौर पर उपयोग होने वाली सामग्री के भाव में भी अंतर आया है। धनिया ₹200 रुपये किलो तक पहुंचने से यह बाजार की महंगी वस्तुओं में शामिल हो गया है। हरी मिर्च ₹120 रुपये किलो, जबकि अदरक और लहसुन ₹150 रुपये किलो तक बिक रहे हैं।
प्रमुख सब्जियों के मौजूदा भाव

इन भावों में आलू की कीमत अन्य कई सब्जियों की तुलना में कम बताई गई है। लाल आलू ₹20 रुपये किलो और सफेद आलू ₹18 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उन उत्पादों पर भी दिखाई दे रहा है जिनका इस्तेमाल लगभग रोजाना घरों में किया जाता है। धनिया, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक जैसे सामान कम मात्रा में खरीदे जाने के बावजूद नियमित घरेलू खर्च का हिस्सा हैं।
धनिया का ₹200 रुपये किलो और हरी मिर्च का ₹120 रुपये किलो तक पहुंचना इसी वजह से बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि उपभोक्ताओं की वास्तविक खरीद मात्रा सब्जी और परिवार की जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
हरी सब्जियों के मामले में भी कई वस्तुएं ₹50 रुपये किलो से ऊपर बिक रही हैं। टमाटर, बैंगन, करेला, तोरई और परवल का भाव ₹60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। फूलगोभी ₹80 रुपये प्रति पीस तक बिक रही है।
सब्जियों के बढ़े दाम का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों की भोजन तैयार करने की लागत पर भी इसका असर पड़ा है। सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से तैयार भोजन की लागत बढ़ी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर सामान्य थाली की कीमत ₹150 से ₹200 तक पहुंच गई है। सब्जियों की खरीद में बढ़ी लागत भोजन तैयार करने वाले कारोबारियों के कुल खर्च का हिस्सा बन रही है। ऐसे में होटल और ढाबों में परोसे जाने वाले भोजन की मौजूदा कीमतों पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है।
सब्जियों के बढ़े भाव से घरेलू बाजार में रोजमर्रा की खरीदारी का खर्च बढ़ गया है। जिन परिवारों के भोजन में हरी सब्जियों का नियमित इस्तेमाल होता है, उनके लिए मौजूदा भाव के अनुसार साप्ताहिक खरीदारी का हिसाब पहले की तुलना में अधिक हो सकता है।
एक ओर धनिया, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक जैसी सामग्री महंगी हुई हैं, वहीं टमाटर, बैंगन, तोरई, परवल और करेला जैसी कई सामान्य सब्जियां भी ₹60 रुपये किलो तक बिक रही हैं। इसके मुकाबले लौकी और खीरा ₹40 रुपये किलो पर उपलब्ध हैं।
आलू की कीमत अपेक्षाकृत कम रहने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है। लाल आलू ₹20 रुपये किलो और सफेद आलू ₹18 रुपये किलो बिक रहे हैं। सब्जियों की कुल खरीद में आलू का इस्तेमाल अधिक होने के कारण इसका कम भाव घरेलू खर्च की गणना में अलग असर डाल सकता है।
स्थानीय बाजार में सब्जियों के भाव अलग-अलग वस्तुओं के अनुसार काफी भिन्न हैं। जहां आलू ₹18 से ₹20 रुपये किलो में बिक रहा है, वहीं धनिया का भाव ₹200 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह हरी मिर्च, लहसुन, अदरक और शिमला मिर्च की कीमतें भी सामान्य सब्जियों की तुलना में अधिक हैं।
टमाटर, बैंगन, करेला, तोरई, परवल और गाजर का भाव ₹60 रुपये किलो तक है। भिंडी और नेनुआ ₹50 रुपये किलो पर हैं। लौकी और खीरे का भाव ₹40 रुपये किलो बताया गया है।
यह अंतर सब्जियों की उपलब्धता और बाजार में उनके मौजूदा भाव को अलग-अलग स्तर पर दर्शाता है। उपलब्ध जानकारी में इन कीमतों के लिए अलग-अलग दुकानों या बाजारों के बीच संभावित अंतर का विवरण नहीं दिया गया है।
सब्जियों की कीमतों में वृद्धि का असर भोजन तैयार करने वाले कारोबार पर भी पड़ा है। होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों की खरीद लागत बढ़ने से भोजन की कुल लागत में भी वृद्धि हुई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर सामान्य थाली ₹150 से ₹200 तक पहुंची है। ऐसे कारोबार में सब्जियों के अलावा अन्य खाद्य सामग्री की कीमत भी कुल लागत तय करती है, लेकिन मौजूदा समय में सब्जियों के बढ़े दाम भी खर्च का एक हिस्सा हैं। स्थानीय बाजार की मौजूदा स्थिति में घरों के साथ भोजन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी बढ़े हुए सब्जी भाव के अनुसार खरीदारी करनी पड़ रही है।