राख नहीं बनेगी बेकार! अब इसी से तैयार होगी जैविक खाद, महिलाओं की इस पहल ने डीएम को भी किया प्रभावित

31 Jul 2026

जिस राख को आमतौर पर बेकार समझकर छोड़ दिया जाता है, वही अब किसानों के लिए उपयोगी जैविक खाद में बदल रही है। अम्बेडकरनगर के विकास खंड टांडा स्थित ग्राम पंचायत वड्डूपुर में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस दिशा में एक नई पहल शुरू की है, जिसने जिलाधिकारी ईशा प्रिया का भी ध्यान आकर्षित किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण आजीविका और प्राकृतिक खेती को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

वड्डूपुर में लक्ष्मी आजीविका स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुमित्रा यादव ने बिहार के बेगूसराय में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर एनटीपीसी की बॉटम ऐश के उपयोग से जैविक खाद तैयार करना शुरू किया। वर्तमान में समूह इस खाद का उत्पादन कर रहा है और इसे किसानों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने तैयार की जा रही जैविक खाद की गुणवत्ता का अवलोकन किया। उन्होंने समूह की महिलाओं के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक होगी बल्कि प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहन देगी। उन्होंने महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बनाए रखने और इसके विपणन पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि विकास खंड स्तर पर उपायुक्त स्वतः रोजगार की अध्यक्षता में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। विशेष रूप से एनटीपीसी के आसपास स्थित गांवों के किसानों को इस जैविक खाद के उपयोग और खरीद के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ सकें।

ग्राम पंचायत भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी पंचायत लर्निंग सेंटर में संचालित डिजिटल लाइब्रेरी भी पहुंचीं। यहां उन्होंने अध्ययन कर रहे बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, उपलब्ध डिजिटल संसाधनों और सुविधाओं की जानकारी ली। साथ ही विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने और डिजिटल लाइब्रेरी का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

स्वयं सहायता समूह की इस पहल को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इस मॉडल का विस्तार अन्य गांवों तक किया जाता है तो इससे किसानों को जैविक खेती के लिए स्थानीय स्तर पर विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त स्वतः रोजगार, खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी (ग्राम्य विकास), ग्राम पंचायत सचिव, बीएमएम, लक्ष्मी आजीविका स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुमित्रा यादव तथा समूह की अन्य महिला सदस्य उपस्थित रहीं।