अम्बेडकरनगर के अकबरपुर तहसील क्षेत्र में दुकान का ताला तोड़कर सामान बाहर निकालने, फर्नीचर में तोड़फोड़ करने और जबरन कब्जा करने के आरोप में अकबरपुर तहसीलदार संतोष कुमार समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश के बाद हुई है। कोतवाली अकबरपुर पुलिस ने नामजद आरोपियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला ग्राम सिझौली, शहजादपुर स्थित एक मकान में बनी दुकान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता सोएब रिजवी ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर दुकान पर कब्जे और सामान को नुकसान पहुंचाने से संबंधित आरोप लगाए थे। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
अरिया गांव निवासी सोएब रिजवी ने अपने प्रार्थनापत्र में बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 में ग्राम सिझौली, शहजादपुर स्थित मकान संख्या 633 को उसके स्वामी से 14.50 लाख रुपये में खरीदा था। शिकायतकर्ता के अनुसार मकान में स्थित दुकान में उन्होंने फर्नीचर और रैक लगाकर कारोबार शुरू किया था।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बाद में मकान को लेकर संघतिया शहजादपुर निवासी अरुण कुमार के साथ विवाद शुरू हो गया। उनके अनुसार इस विवाद को लेकर उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी की थी।
शिकायत में कहा गया है कि मामले की जांच के दौरान उपजिलाधिकारी की ओर से इसे सिविल प्रकृति का विवाद बताया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रशासनिक स्तर पर कब्जा परिवर्तन की कार्रवाई न किए जाने की बात भी कही गई थी।
सोएब रिजवी ने न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया कि 20 फरवरी 2026 को अरुण कुमार अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए तहसीलदार संतोष कुमार को मौके पर लेकर पहुंचे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, तहसीलदार की मौजूदगी में दुकान का ताला तोड़ा गया। आरोप है कि दुकान के अंदर रखा सामान बाहर निकाल दिया गया और वहां मौजूद फर्नीचर को भी तोड़कर बाहर फेंक दिया गया।
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शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि जब सोएब रिजवी ने इस कार्रवाई का विरोध किया तो उन्हें धमकी दी गई। इसके बाद दुकान पर दूसरा ताला लगाए जाने की बात भी कही गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध जानकारी में नहीं है। पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है।
शिकायतकर्ता ने केवल दुकान का ताला तोड़ने और सामान बाहर निकालने का ही आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने दुकान के सामने मौजूद खाली जमीन पर टिनशेड डालकर कब्जा करने का आरोप भी लगाया है।
प्रार्थनापत्र के अनुसार, यह विवाद पहले से चला आ रहा था और इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब प्रशासनिक स्तर पर मामले को सिविल प्रकृति का बताया गया, इसके बावजूद 20 फरवरी को कथित रूप से दुकान में कार्रवाई की गई। इस घटनाक्रम को लेकर शिकायतकर्ता ने पुलिस से शिकायत किए जाने का भी उल्लेख किया है।
सोएब रिजवी के अनुसार, घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन आरोप है कि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थनापत्र दाखिल किया।
सीजेएम के आदेश के बाद कोतवाली अकबरपुर पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस रिपोर्ट में अकबरपुर तहसीलदार संतोष कुमार समेत नामजद आरोपियों और अज्ञात लोगों को शामिल किया गया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस की ओर से अभी जांच के निष्कर्ष या आरोपों की पुष्टि को लेकर कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
शिकायतकर्ता की ओर से दिए गए विवरण के मुताबिक, विवाद की शुरुआत मकान और उससे संबंधित दुकान पर अधिकार को लेकर हुई। सोएब रिजवी का दावा है कि उन्होंने वर्ष 2020 में मकान संख्या 633 को 14.50 लाख रुपये में खरीदा था और दुकान में फर्नीचर व रैक लगाकर कारोबार शुरू किया था।
बाद में इस संपत्ति को लेकर अरुण कुमार के साथ विवाद हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई और उपजिलाधिकारी ने इसे सिविल प्रकृति का विवाद माना।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने 20 फरवरी 2026 की घटना का आरोप लगाया। उनके अनुसार, अरुण कुमार तहसीलदार संतोष कुमार के साथ मौके पर पहुंचे और उनकी मौजूदगी में दुकान का ताला तोड़ दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दुकान से सामान निकालने के साथ फर्नीचर भी क्षतिग्रस्त किया गया और बाद में दूसरा ताला लगा दिया गया।
मामले में न्यायिक हस्तक्षेप के बाद पुलिस की कार्रवाई हुई है। सीजेएम के आदेश के आधार पर कोतवाली अकबरपुर में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने नामजद आरोपियों के साथ कुछ अज्ञात लोगों को भी रिपोर्ट में शामिल किया है।
मुकदमा दर्ज होना किसी आरोपी के खिलाफ आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों में अकबरपुर तहसीलदार संतोष कुमार की मौजूदगी का उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि 20 फरवरी 2026 को तहसीलदार मौके पर पहुंचे और उनकी मौजूदगी में दुकान का ताला तोड़ा गया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि शिकायतकर्ता ने पहले से चल रहे संपत्ति विवाद को प्रशासनिक स्तर पर सिविल प्रकृति का बताए जाने का दावा किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में तहसीलदार की ओर से इन आरोपों पर कोई पक्ष या प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। इसी तरह अन्य नामजद आरोपियों की ओर से भी इस मामले में कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने मामले से जुड़े आरोपों की जांच का दायित्व है। उपलब्ध विवरण के आधार पर जांच में दुकान के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, घटना से संबंधित परिस्थितियां, दुकान में मौजूद सामान और फर्नीचर को नुकसान पहुंचने के आरोप तथा कथित कब्जे से संबंधित तथ्यों की पड़ताल हो सकती है।
हालांकि, पुलिस जांच में किन विशेष बिंदुओं को शामिल किया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले में किसी आरोप को अंतिम रूप से सत्य मानना अभी उचित नहीं है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मकान संख्या 633 की खरीद वर्ष 2020 में 14.50 लाख रुपये में की गई थी। इसी मकान में स्थित दुकान में फर्नीचर और रैक लगाकर कारोबार शुरू करने की बात कही गई है।
इसके बाद संपत्ति को लेकर अरुण कुमार के साथ विवाद होने का दावा किया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मामला प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष भी पहुंचा, जहां इसे सिविल प्रकृति का विवाद बताया गया था।
वर्तमान मुकदमा दुकान का ताला तोड़ने, सामान बाहर निकालने, फर्नीचर में तोड़फोड़ और कथित कब्जे के आरोपों से संबंधित है। पुलिस जांच के बाद ही मामले के तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
कोतवाली अकबरपुर पुलिस ने सीजेएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित तथ्यों की जांच करेगी।
मामले में आरोपित पक्षों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और जांच जारी है।