अम्बेडकरनगर में गणेश उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। नगर और ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह बनाए गए पंडालों में प्रथम पूज्य भगवान गणेश की प्रतिमाओं की विधि-विधान से स्थापना की गई। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और आरती के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश का पूजन किया। प्रतिमा स्थापना के अवसर पर पुष्पवर्षा कर गणपति बप्पा का स्वागत किया गया।
पंडालों में ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारे सुनाई दिए। घंट-घड़ियाल, शंख और मंजीरों की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने आरती में हिस्सा लिया। लोगों ने भगवान गणेश के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की प्रार्थना की।
गणेश उत्सव के लिए तैयार किए गए सार्वजनिक पंडालों में आचार्यों और पुरोहितों के सानिध्य में प्रतिमा स्थापना का कार्यक्रम हुआ। मुख्य यजमानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और विधिवत प्रतिमा स्थापित की। पूजन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। प्रतिमा स्थापना के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पंडालों में धार्मिक माहौल के बीच लोगों ने भगवान गणेश की आरती में भाग लिया।
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नगर क्षेत्र में गणेश उत्सव के लिए बड़े स्तर पर करीब छह प्रमुख पंडाल सजाए गए हैं। इसके अलावा घरों और ग्रामीण अंचलों में भी कई छोटे-बड़े पंडाल बनाए गए हैं। इन स्थानों पर गणपति की प्रतिमाएं स्थापित कर धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की गई है। पंडालों को रंग-बिरंगी झालरों, आकर्षक रोशनी और सजावटी सामग्री से सजाया गया है। शाम के समय रोशनी से जगमगाते पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। विभिन्न स्थानों पर उत्सव के दौरान विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की भी तैयारी की गई है।
गणेश उत्सव को लेकर बच्चों और युवाओं में भी उत्साह दिखाई दिया। पंडालों में बज रहे भक्ति गीतों के दौरान बच्चे और युवा उत्साह के साथ नजर आए। सार्वजनिक पंडालों के अलावा परिवारों ने भी अपने घरों में भगवान गणेश की छोटी प्रतिमाएं स्थापित कीं। घर में गणपति स्थापना करने वाले लोगों ने परिवार के साथ पूजा-अर्चना की। गृहस्थों ने विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
प्रतिमा स्थापना के दौरान शंखध्वनि, घंट-घड़ियाल और मंजीरों की आवाज के बीच आरती की गई। श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित किए और भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। कई पंडालों में प्रतिमा स्थापना के समय श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा भी की। ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारों के बीच पंडालों में धार्मिक वातावरण बना रहा। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
गणेश उत्सव का आयोजन केवल सार्वजनिक पंडालों तक सीमित नहीं रहा। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों ने अपने घरों में भी भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित कीं। परिवार के सदस्यों ने एक साथ पूजा-अर्चना की और भगवान गणेश से सुख-शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना की। घरों में स्थापित की गईं प्रतिमाओं के सामने भी विधिवत पूजन किया गया। लोगों ने धार्मिक परंपरा के अनुसार गणपति की आराधना की और प्रसाद चढ़ाया।