अंबेडकरनगर में बुधवार को ललई छठ पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने व्रत रखा। इस अवसर पर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान श्रीकृष्ण एवं छठ माता से अपनी संतान की खुशहाली तथा दीर्घायु की कामना की।
ललई छठ पर्व को लेकर सुबह से ही महिलाओं में उत्साह दिखाई दिया। व्रती महिलाओं ने स्नान आदि के बाद पूजा की तैयारियां शुरू कीं। घरों में पारंपरिक पकवान और प्रसाद तैयार किए गए। इसके बाद महिलाएं पूजा सामग्री लेकर नदी, घाट और जलाशयों के किनारे पहुंचीं और निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की।
नगर क्षेत्र में ललई छठ की पूजा के लिए कई स्थानों पर महिलाएं पहुंचीं। नगर के फौव्वारा तिराहे के पास स्थित शिवाला घाट और तमसा नदी के किनारे महिलाओं ने पूजा-अर्चना की।
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इसके अलावा शिवाला मंदिर, कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास तथा विभिन्न नदी-पोखरों के समीप भी महिलाओं ने पूजा की। व्रती महिलाओं ने पूजा सामग्री के साथ इन स्थानों पर पहुंचकर संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की।
पूजा के दौरान महिलाओं ने परिवार की सुख-शांति और संतान की सुख-समृद्धि की कामना भी की। पर्व के चलते नगर क्षेत्र के साथ ग्रामीण इलाकों में भी धार्मिक गतिविधियां देखने को मिलीं।
ललई छठ को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इसी मान्यता के तहत माताओं ने बुधवार को व्रत रखकर पूजा-अर्चना की।
व्रती महिलाओं ने पूजा की तैयारियों के लिए घरों में पारंपरिक पकवान और प्रसाद तैयार किए। स्नान आदि के बाद पूजा सामग्री के साथ महिलाएं निर्धारित पूजा स्थलों पर पहुंचीं। वहां विधि-विधान से पूजा कर संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की गई।
ललई छठ पर्व को लेकर अंबेडकरनगर के ग्रामीण और नगर दोनों क्षेत्रों में श्रद्धा का माहौल रहा। महिलाओं ने अपने परिवार की परंपराओं के अनुसार पर्व मनाया और पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।
नगर के विभिन्न पूजा स्थलों पर महिलाओं की मौजूदगी रही। नदी, घाट और जलाशयों के आसपास महिलाओं ने पूजा सामग्री के साथ पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान किए। इस दौरान संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की गई।
ललई छठ के अवसर पर महिलाओं ने भगवान श्रीकृष्ण एवं छठ माता की पूजा-अर्चना की। पूजा के माध्यम से व्रती महिलाओं ने अपनी संतान की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
पर्व के दौरान महिलाओं ने धार्मिक विधि-विधान का पालन करते हुए पूजा की। घर से तैयार किए गए पारंपरिक पकवान और प्रसाद भी पूजा की तैयारियों का हिस्सा रहे।