अंबेडकरनगर में पिछले करीब एक से डेढ़ माह के दौरान खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से घरेलू रसोई का बजट प्रभावित हुआ है। आटा, चावल, दाल और खाद्य तेल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के साथ मसालों और ड्राईफ्रूट की कीमतों में भी बढ़ोतरी बताई गई है। शहजादपुर समेत नगर के किराना बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे लोगों को पहले की तुलना में कई सामानों के लिए अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है।
बढ़ी कीमतों का असर खास तौर पर मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के घरेलू खर्च पर दिखाई देने की बात कही गई है। लोगों के अनुसार आमदनी में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि रोजमर्रा के इस्तेमाल की खाद्य वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके चलते मासिक खर्च को संतुलित करना मुश्किल हो रहा है।
आढ़ती अमित वर्मा के अनुसार चावल का भाव पहले करीब 4200 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 5400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इसी तरह गेहूं का भाव करीब 2400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2800 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है।
सरसों के भाव में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमित वर्मा के मुताबिक सरसों का भाव पहले करीब 5000 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब 7000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
थोक कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के साथ ही फुटकर बाजार में भी कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। इससे रोजाना की खरीदारी पर सीधे असर पड़ रहा है। फुटकर बाजार में चावल की कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 54 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। आटे का भाव 32 रुपये से बढ़कर 40 रुपये प्रति किलो बताया गया है।
खाद्य तेलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। सरसों तेल की कीमत 165 रुपये से बढ़कर 200 रुपये प्रति किलो हो गई है। मूंगफली तेल 170 रुपये से बढ़कर 230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं रिफाइंड तेल की कीमत 130 रुपये से बढ़कर 190 रुपये प्रति किलो बताई गई है।
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दाल और अन्य खाद्य वस्तुओं में भी कीमतें बढ़ी हैं। चने का भाव 65 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो हो गया है। राजमा 120 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
इन कीमतों के बढ़ने से सामान्य किराना खरीदारी का कुल खर्च पहले की तुलना में अधिक हो गया है। आटा, चावल और तेल जैसे जरूरी सामानों की बढ़ी कीमतों का असर रोजाना के भोजन की लागत पर भी पड़ रहा है।
खाद्य वस्तुओं के अलावा ड्राईफ्रूट के दामों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी बताई गई है। काजू की कीमत 720 रुपये से बढ़कर 950 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। बादाम 750 रुपये से बढ़कर 1100 रुपये प्रति किलो हो गया है।
किशमिश का भाव 280 रुपये से बढ़कर 480 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। चिरौंजी 1200 रुपये से बढ़कर 1700 रुपये प्रति किलो हो गई है। गरी गोला की कीमत 280 रुपये से बढ़कर 400 रुपये प्रति किलो बताई गई है।
इसी तरह अखरोट का भाव 1150 रुपये से बढ़कर 1250 रुपये प्रति किलो और अंजीर 750 रुपये से बढ़कर 950 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। ड्राईफ्रूट सामान्य घरेलू राशन की तुलना में अलग श्रेणी में आते हैं, लेकिन कीमतों में वृद्धि का असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ता है जो इनका नियमित या जरूरत के अनुसार उपयोग करते हैं।
खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच कुछ गरीब परिवारों के भोजन के तरीके में भी बदलाव की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब डेढ़ माह पहले जिन परिवारों के घर दोनों समय रोटी और चावल बनते थे, उनमें अब कुछ परिवार खर्च कम करने के लिए एक समय रोटी और दूसरे समय चावल बनाने लगे हैं।
आटा, चावल और खाद्य तेल की बढ़ी कीमतों ने रोजाना के भोजन की लागत को प्रभावित किया है। इसके कारण कम आय वाले परिवारों को घरेलू खर्च तय करने में अधिक सावधानी बरतनी पड़ रही है। यह बदलाव उन परिवारों की स्थिति को दर्शाता है जिनके लिए खाद्य सामग्री की कीमतों में छोटी वृद्धि भी मासिक बजट में असर डाल सकती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ दुकानदार खाद्य सामग्री की जमाखोरी कर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। खरीदारी के दौरान कीमतों को लेकर ग्राहकों और दुकानदारों के बीच नोकझोंक की स्थिति बनने की बात भी कही गई है।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में किसी विशिष्ट दुकानदार के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई या जमाखोरी की पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है। लोगों ने बाजार की नियमित जांच और खाद्य वस्तुओं के दामों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
बढ़ी कीमतों के बीच लोगों ने प्रशासन से बाजारों में नियमित जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए और यदि कहीं जमाखोरी या अनुचित मूल्य वसूली पाई जाती है तो उस पर रोक लगाई जानी चाहिए। स्थानीय उपभोक्ताओं की मांग में बाजार की निगरानी, खाद्य सामग्री की उपलब्धता और कीमतों की जांच प्रमुख रूप से शामिल है।