रक्षाबंधन का त्योहार करीब आते ही अम्बेडकरनगर के बाजारों में भाई-बहन के इस खास पर्व की तैयारियां दिखाई देने लगी हैं। दुकानों पर रंग-बिरंगी राखियों की कतारें सजी हैं और बाजार में इस बार केवल पारंपरिक राखियों तक खरीदारी सीमित नहीं है। बच्चों, युवाओं और भाभियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों ने अलग-अलग डिजाइन, रंग, आकार और थीम वाली राखियां उपलब्ध कराई हैं।
बाजार में करीब 20 रुपये से शुरू होकर 300 रुपये तक की राखियां बिक रही हैं। इनमें साधारण राखियों के साथ फैंसी, डिजाइनर, धार्मिक प्रतीकों वाली, संगीत बजाने वाली और कार्टून पात्रों से सजी राखियां शामिल हैं। ऐसे में रक्षाबंधन की खरीदारी इस बार बाजार में पसंद की विविधता का भी नजारा पेश कर रही है।
रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते और उससे जुड़ी भावनाओं का त्योहार भी है। यही वजह है कि राखी का चुनाव भी अब केवल एक सामान्य धागे तक सीमित नहीं रह गया है।
यह खबर भी पढ़े - अंबेडकरनगर के महामाया मेडिकल कॉलेज में नशा मुक्ति केंद्र शुरू, निशुल्क इलाज
अम्बेडकरनगर के बाजार में उपलब्ध राखियों की वैरायटी से यह साफ दिखाई देता है कि ग्राहकों के लिए डिजाइन और पसंद भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। किसी को धार्मिक प्रतीक वाली राखी पसंद है, तो किसी की पसंद बच्चों के कार्टून पात्रों तक पहुंचती है। कुछ राखियां अपने रंग और सजावट से आकर्षित कर रही हैं, जबकि कुछ में संगीत जैसी विशेषताएं जोड़ी गई हैं।
इस बार बाजार में राखियों की कीमत काफी अलग-अलग है। करीब 20 रुपये की सामान्य राखियों से लेकर 300 रुपये तक की आकर्षक और विशेष डिजाइन वाली राखियां उपलब्ध हैं।
यानी ग्राहकों के पास अपने बजट के अनुसार चुनाव करने के लिए कई विकल्प हैं। सामान्य राखी खरीदने वाले ग्राहक भी बाजार में अपनी पसंद का विकल्प देख सकते हैं, वहीं बच्चों और विशेष अवसर के लिए कुछ अलग खरीदने वाले ग्राहकों के लिए महंगी और डिजाइनर राखियां भी मौजूद हैं। राखी के दाम में यह अंतर उसके डिजाइन और विशेषताओं के आधार पर दिखाई देता है।
रक्षाबंधन पर बच्चों के लिए राखी चुनना परिवारों के लिए खरीदारी का एक अलग हिस्सा होता है। इस बार बाजार में बच्चों को ध्यान में रखकर कार्टून पात्रों वाली कई राखियां उपलब्ध हैं।
चुंबक लगी कार्टून राखी करीब 100 रुपये में मिल रही है। इसके अलावा छोटे बच्चों के लिए खिलौने जैसी आकर्षक राखियां भी बाजार में रखी गई हैं, जिनकी कीमत 300 रुपये तक पहुंच रही है। इन राखियों में पारंपरिक रूप के बजाय बच्चों की पसंद को प्राथमिकता दी गई है। चमकीले रंग और आकर्षक डिजाइन इन्हें सामान्य राखियों से अलग बनाते हैं।
बाजार में करीब 80 रुपये की गुड्डे वाली राखी भी ग्राहकों के बीच पसंद की जा रही है। इसका डिजाइन बच्चों और युवाओं दोनों को आकर्षित कर रहा है। वहीं करीब 150 रुपये में उपलब्ध गोलू-मोलू राखी की खासियत यह है कि उसमें गाना बजता है। संगीत वाली राखी पारंपरिक राखियों से अलग एक विशेष विकल्प के रूप में बाजार में मौजूद है। इस तरह कुछ राखियां अपनी सजावट और डिजाइन के कारण खास हैं, तो कुछ अपनी अतिरिक्त विशेषताओं की वजह से अलग नजर आ रही हैं।
रक्षाबंधन की खरीदारी में धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों वाली राखियों की भी अपनी जगह है। अम्बेडकरनगर के बाजार में खाटू श्याम की राखी 45 से 60 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध है।
इसी तरह ओम वाली राखी करीब 120 रुपये में बिक रही है। इन राखियों में धार्मिक प्रतीकों को डिजाइन का हिस्सा बनाया गया है और इन्हें सामान्य राखियों के साथ अलग विकल्प के रूप में रखा गया है।
रक्षाबंधन की खरीदारी केवल भाई की कलाई तक सीमित नहीं है। परिवारों में भाभियों के लिए भी राखियां खरीदी जाती हैं और इसके लिए बाजार में लुंबा राखी की अलग वैरायटी उपलब्ध है। भाभियों के लिए तैयार की गई लुंबा राखी करीब 170 रुपये में मिल रही है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सामान्य राखियों से अलग दिखाई देती है।
दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक अब राखी खरीदते समय केवल कीमत को ध्यान में नहीं रखते। डिजाइन, रंग, धार्मिक प्रतीक, रोशनी, संगीत और बच्चों के पसंदीदा कार्टून पात्र भी खरीदारी के निर्णय का हिस्सा बन रहे हैं।
इसी वजह से बाजार में पारंपरिक राखियों के साथ फैंसी और थीम आधारित राखियों की मांग भी दिखाई दे रही है। बाजार में मौजूद वैरायटी यह भी दिखाती है कि अलग-अलग उम्र और पसंद के ग्राहकों के लिए दुकानदार अलग विकल्प तैयार कर रहे हैं।
रक्षाबंधन के त्योहार में राखी का भावनात्मक महत्व सबसे प्रमुख है, लेकिन बाजार में उपलब्ध विकल्पों ने खरीदारी को भी विविध बना दिया है। किसी परिवार में बच्चे के लिए कार्टून राखी चुनी जा रही है, तो किसी के लिए धार्मिक प्रतीक वाली राखी पसंद की जा रही है।
युवाओं के लिए डिजाइनर और संगीत वाली राखियां उपलब्ध हैं, जबकि भाभियों के लिए लुंबा राखी अलग विकल्प पेश करती है। इस तरह इस बार अम्बेडकरनगर का राखी बाजार परंपरा और नए डिजाइन के मेल का दृश्य प्रस्तुत कर रहा है।