गुरु पूर्णिमा और संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर अम्बेडकरनगर के जलालपुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित समरसता संकल्प अभियान के तहत पूर्व जिलाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी ने विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर संत-महात्माओं का सम्मान किया। इस दौरान उन्होंने दीपोत्सव कार्यक्रमों में भी सहभागिता कर समाज में समरसता, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया।
समरसता संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत जीवत स्थित औघड़ बाबा धाम से हुई। इसके बाद डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी ने राम जानकी मंदिर सकरा यूसुफपुर, राम जानकी मंदिर ग्यासपुर, बनरा बाबा पंखरपुर और पारा शिव मंदिर पहुंचकर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। विभिन्न स्थानों पर मौजूद संत-महात्माओं का सम्मान करते हुए उन्होंने उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु परंपरा का विशेष स्थान है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि समाज को सेवा, समरसता और सद्भाव का मार्ग भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाने का माध्यम बनते हैं।
उन्होंने कहा कि समरसता संकल्प अभियान का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को जोड़ते हुए आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है। गुरु पूर्णिमा और संत रविदास जयंती जैसे अवसर समाज को सकारात्मक दिशा देने का संदेश देते हैं।
धार्मिक स्थलों पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रमों में भी डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी ने सहभागिता की। इस दौरान श्रद्धालुओं के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में युवा मोर्चा के क्षेत्रीय महामंत्री एवं सिसर ग्राम प्रधान रोहित चौधरी, मंडल महामंत्री विपिन कन्नौजिया, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अभिषेक उपाध्याय, मंडल महामंत्री संतोष पांडे, किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष बृजेश सिंह, मंडल उपाध्यक्ष दीपचंद गुप्ता, अभिषेक, धर्मेंद्र यादव, त्रिवेणी सिंह सहित अनेक कार्यकर्ता एवं सम्मानित नागरिक मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान वक्ताओं ने समाज में आपसी सद्भाव, सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संतों के सम्मान और दीपोत्सव जैसे आयोजनों को समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला बताया गया।