अम्बेडकरनगर में चीनी की बढ़ती कीमतों का असर आम उपभोक्ताओं की रसोई और मिठाई बाजार दोनों पर दिखाई दे रहा है। करीब एक-दो माह पहले तक थोक बाजार में 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिकने वाली चीनी अब 6,200 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। वहीं फुटकर बाजार में भी चीनी का भाव 43-44 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 70 रुपये किलो हो गया है।
चीनी की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर मिठाई बनाने की लागत पर भी पड़ा है। इसके चलते कई प्रमुख मिठाइयों के दाम में 50 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रक्षाबंधन के पर्व से पहले मिठाइयों की बढ़ी कीमतों से ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।
बाजार के मौजूदा भाव के अनुसार, एक-दो माह के भीतर चीनी के थोक दाम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकने वाली चीनी अब 6,200 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गई है।
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इसका सीधा असर फुटकर बाजार में भी दिखाई दे रहा है। जहां पहले उपभोक्ताओं को चीनी करीब 43 से 44 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, वहीं अब इसका भाव करीब 70 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है।
इस तरह फुटकर कीमत में करीब 26 से 27 रुपये प्रति किलो का अंतर आया है। घरेलू उपयोग के लिए नियमित रूप से चीनी खरीदने वाले परिवारों के लिए यह बदलाव सीधे खाद्य बजट से जुड़ा हुआ है।
अकबरपुर चीनी मिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में अम्बेडकरनगर में 31,300 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई थी। वर्ष 2025-26 में यह क्षेत्र घटकर 29,000 हेक्टेयर रह गया।
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आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष में गन्ने की खेती का रकबा 2,300 हेक्टेयर कम हुआ है। उपलब्ध जानकारी में चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे गन्ने के घटते उत्पादन को भी एक कारण बताया गया है।
गन्ने की खेती के रकबे में आई इस कमी को चीनी की उपलब्धता और बाजार कीमतों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में उत्पादन में कमी की मात्रा का अलग से कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है।
चीनी के बढ़ते दाम के पीछे गन्ने के घटते उत्पादन के अलावा एथेनॉल की बढ़ती मांग और बाजार में जमाखोरी को भी कारण बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाजार में चीनी के दाम बढ़ने के लिए इन कारकों का उल्लेख किया गया है। हालांकि इन कारणों में से प्रत्येक का कीमत पर कितना प्रभाव पड़ा, इसका अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस बीच बाजार में लगातार बढ़ते भाव ने चीनी खरीदने वाले उपभोक्ताओं और उससे जुड़े कारोबारियों दोनों के लिए कीमतों में बदलाव को महत्वपूर्ण बना दिया है।
चीनी की कीमत में बढ़ोतरी का असर मिठाई बाजार में भी दिखाई दे रहा है। मिठाई बनाने में चीनी एक प्रमुख कच्चा माल है। व्यापारियों का कहना है कि चीनी महंगी होने से मिठाई तैयार करने की लागत बढ़ी है और इसका असर बाजार कीमतों पर पड़ रहा है।
कई मिठाइयों के दाम में 50 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। उपलब्ध कीमतों के अनुसार:
- बर्फी: 400 रुपये से बढ़कर 500 रुपये प्रति किलो
- पेड़ा: 450 रुपये से बढ़कर 500 रुपये प्रति किलो
- मिल्क केक: 500 रुपये से बढ़कर 555 रुपये प्रति किलो
इन कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर खास तौर पर त्योहारों के समय दिखाई दे रहा है, जब मिठाइयों की खरीद बढ़ती है।
रक्षाबंधन के पर्व से पहले मिठाइयों के महंगे होने से ग्राहकों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। त्योहार के लिए मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
चीनी के फुटकर भाव में बढ़ोतरी और मिठाइयों के दाम में हुए बदलाव ने त्योहार से जुड़ी खरीदारी की लागत को प्रभावित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बर्फी, पेड़ा और मिल्क केक जैसी मिठाइयों की कीमत पहले के मुकाबले बढ़ी है।
व्यापारियों के अनुसार, चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई बनाने की लागत में इजाफा हुआ है। उनके मुताबिक, कच्चे माल की लागत बढ़ने का असर तैयार मिठाइयों के बाजार भाव पर पड़ता है।
मिठाई विक्रेताओं के इस पक्ष के अनुसार, चीनी की मौजूदा कीमतों का सीधा संबंध उत्पादन लागत से है। उपलब्ध जानकारी में किसी व्यापारी का व्यक्तिगत नाम या प्रत्यक्ष उद्धरण उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे सामान्य व्यापारी पक्ष के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।
चीनी की कीमत बढ़ने का असर केवल मिठाई बाजार तक सीमित नहीं है। घरेलू स्तर पर चीनी रोजमर्रा की खाद्य जरूरतों में इस्तेमाल होने वाली वस्तु है। फुटकर कीमत 43-44 रुपये से बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलो पहुंचने से उपभोक्ताओं को प्रति किलो खरीद पर पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। दूसरी ओर, मिठाइयों के दाम बढ़ने से त्योहारों पर होने वाली खरीदारी का खर्च भी बढ़ा है। रक्षाबंधन से पहले बाजार में इसका असर विशेष रूप से देखा जा रहा है।