विकसित भारत 2047 पर भाषण प्रतियोगिता में आंचल मिश्र प्रथम, 11 कॉलेजों के 33 विद्यार्थी हुए शामिल

01 Oct 2026

देश के विकास की परिकल्पना केवल आर्थिक तरक्की तक सीमित नहीं है। शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को लेकर युवाओं की सोच भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी विषय को केंद्र में रखते हुए अम्बेडकरनगर में विद्यार्थियों के बीच एक भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता में आंचल मिश्र ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंतिम यादव दूसरे और कलश द्विवेदी तीसरे स्थान पर रहे। कार्यक्रम का विषय “विकसित भारत @ 2047 : आत्मनिर्भर भारत का संकल्प” रखा गया था।

अम्बेडकरनगर में आयोजित इस प्रतियोगिता के लिए संबंधित महाविद्यालय को जिले का नोडल केंद्र बनाया गया था। इसमें जनपद के कुल 11 महाविद्यालयों से 33 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने विकसित भारत की परिकल्पना, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। भाषणों में युवा शक्ति, शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और स्वदेशी जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्यों के माध्यम से बताया कि देश की विकास यात्रा में युवाओं की भागीदारी किन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हो सकती है।

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प्रतियोगिता के परिणामों में आंचल मिश्र ने पहला स्थान प्राप्त किया। अंतिम यादव दूसरे और कलश द्विवेदी तीसरे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के भाषणों का मूल्यांकन निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया। इसमें विषयवस्तु की प्रासंगिकता, प्रस्तुतीकरण, तार्किकता, भाषा-शैली और अभिव्यक्ति को शामिल किया गया था। निर्णायक मंडल में डॉ. अरुण कुमार, डॉ. तेज भान मिश्र और डॉ. धनंजय मौर्य शामिल रहे। निर्णायकों ने इन्हीं मानकों के आधार पर प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का आकलन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. शुचिता पाण्डेय ने की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर नागरिकों के निर्माण से जुड़ा व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने युवाओं को देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण संवाहक बताया। कार्यक्रम में उनके संबोधन के दौरान विकसित भारत की परिकल्पना को विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों से जोड़कर देखा गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. अरविंद वर्मा, प्राचार्य रमाबाई राजकीय डिग्री कॉलेज रहे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी और सहभागिता से संभव है। युवाओं को ज्ञान, कौशल, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। उनके संबोधन में युवाओं की शैक्षणिक क्षमता और कौशल को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने पर जोर रहा। प्रतियोगिता का विषय विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर आधारित था। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अपनी प्रस्तुतियों का हिस्सा बनाया।