केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा, लेकिन अब इससे काफी हद तक मुक्ति मिल चुकी है।
लोकसभा में चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के फैलने के पीछे वामपंथी विचारधारा की भूमिका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने के लिए आदिवासियों को भड़काया गया, जिससे यह समस्या लंबे समय तक बनी रही।
अमित शाह ने कहा कि 1970 से 2026 तक चले इस मुद्दे पर आज संसद में चर्चा हो रही है, जो महत्वपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां अब नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वर्षों में नक्सलवाद समाप्त क्यों नहीं हुआ और आदिवासी क्षेत्र विकास से पीछे क्यों रह गए। गृह मंत्री ने कहा कि आदिवासी समुदाय लंबे समय से अपनी समस्याओं और पीड़ा को संसद में उठाए जाने की अपेक्षा कर रहा था, लेकिन उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि जो लोग नक्सलवाद के समर्थन में बोल रहे हैं, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे संविधान को मानते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि हथियार उठाकर व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ सरकार संविधान के तहत ही कार्रवाई करेगी।
गृह मंत्री ने कहा कि पिछले दशकों में आदिवासी क्षेत्रों में विकास नहीं पहुंच पाया, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग गरीबी में जीवन यापन करते रहे और हजारों युवाओं की जान गई। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है।
अमित शाह ने पूछा: 1970 से अब तक नक्सलवाद खत्म क्यों नहीं हुआ? बस्तर के लोग विकास से पीछे क्यों रह गए? “मैं कई बार कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए, सरकार पुनर्वास करेगी। जो गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से दिया जाता है।”