दिल्ली हाई कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी द्वारा उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जवाब मांगा है। अदालत ने एनआईए को नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया।
आसिया अंद्राबी को आतंकी साजिश रचने, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और एक प्रतिबंधित संगठन की सदस्य होने सहित विभिन्न आरोपों में दोषी ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब उन्होंने उस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में दोषी ठहराई गई दो अन्य महिलाओं, सूफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन, की अपीलों पर भी एनआईए से जवाब तलब किया है। इसके अलावा अदालत ने उस आवेदन पर भी एनआईए से जवाब मांगा है, जिसमें अपील लंबित रहने तक ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा पर रोक लगाने की मांग की गई है।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने 24 मार्च 2026 को फैसला सुनाते हुए आसिया अंद्राबी को आतंकवाद की साजिश, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने तथा प्रतिबंधित संगठन की सदस्यता सहित विभिन्न अपराधों में दोषी करार दिया था। अदालत ने इन अपराधों के लिए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इसी मामले में दोषी ठहराई गई सूफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को विभिन्न अपराधों के लिए 30-30 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। दोनों ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है, जिस पर अब सुनवाई जारी है।
अदालती अभिलेखों के अनुसार, आसिया अंद्राबी प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख थीं। वहीं सूफी फहमीदा संगठन की प्रेस सचिव और नाहिदा नसरीन उसकी महासचिव के पद पर कार्यरत थीं। इसी संगठन से जुड़े आरोपों और अन्य अपराधों के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया था।
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल अपील स्वीकार करते हुए एनआईए को नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही सजा पर अंतरिम रोक लगाने की मांग पर भी एजेंसी से जवाब मांगा गया है।