असम में इस वर्ष आई भीषण बाढ़ का असर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। लगातार बारिश और ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियों के उफान पर होने से राज्य के कई इलाके अब भी पानी में डूबे हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 लाख 12 हजार से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। हालात का जायजा लेने के बाद केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसके आधार पर राज्य के लिए अतिरिक्त राहत सहायता पर फैसला लिया जाएगा।
बाढ़ का सबसे अधिक असर चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में देखने को मिल रहा है। कई गांव अब भी चारों ओर से पानी से घिरे हैं, जिससे लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
लगातार जलभराव के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। इसके अलावा कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे लोगों की दैनिक जिंदगी मुश्किल हो गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, असम राइफल्स और स्थानीय प्रशासन लगातार अभियान चला रहे हैं। विभिन्न जिलों में बनाए गए राहत शिविरों में प्रभावित लोगों को भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) ने हाल ही में सबसे अधिक प्रभावित जिलों का दौरा कर बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा किया है। टीम ने प्रभावित गांवों, कृषि भूमि, सड़कों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की स्थिति का निरीक्षण किया। अब यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर राज्य को अतिरिक्त आर्थिक सहायता और संभावित राहत पैकेज पर निर्णय लिया जाएगा।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक असम और आसपास के राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और निचले इलाकों में जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है।