अयोध्या मेडिकल कॉलेज को मिलेंगी नई सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं, ब्रजेश पाठक ने की ICU और कैथ लैब की घोषणा

04 Oct 2026

अयोध्या में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर आयोजित एक राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की गई। शहर में बढ़ती चिकित्सा जरूरतों और गंभीर मरीजों के उपचार को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं, आधुनिक तकनीक और अस्पताल में आपातकालीन सुविधाओं की उपलब्धता से जुड़े प्रस्ताव सामने आए।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने अयोध्या के राजर्षि दशरथ ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की योजनाएं साझा कीं। इनमें आधुनिक कैथ लैब की स्थापना, तीन सुपर स्पेशियलिटी विभागों का विकास और आईसीयू प्रबंधन को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई से जोड़ना शामिल है।

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तीन दिवसीय इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटेंसिव केयर एंड पेरिऑपरेटिव मेडिसिन (आईएसआईसीपीएम 2026) का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन 2 से 4 अक्टूबर तक अयोध्या मेडिकल कॉलेज में आयोजित किया गया। सम्मेलन के समापन समारोह में ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज में उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं के विस्तार से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी। घोषित योजनाओं के तहत न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभागों को विकसित करने का वादा किया गया। इन विभागों के माध्यम से मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र, गुर्दे तथा पाचन तंत्र से संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है।

अयोध्या मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक कार्डियोलॉजी कैथ लैब स्थापित करने की भी घोषणा की गई। कैथ लैब हृदय रोगों की जांच और कुछ महत्वपूर्ण उपचार प्रक्रियाओं के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष चिकित्सा सुविधा है। इसकी स्थापना से हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं के उपचार के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इस पहल में अयोध्या के स्थानीय निवासियों के साथ शहर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की चिकित्सा जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है। हालांकि, उपलब्ध घोषणा में कैथ लैब के निर्माण की निश्चित समयसीमा और इसकी लागत का विवरण नहीं दिया गया है।

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सम्मेलन में गंभीर मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने के लिए आईसीयू प्रबंधन में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की योजना भी सामने आई। इसके तहत अयोध्या मेडिकल कॉलेज के गहन चिकित्सा कक्षों को लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) से डिजिटल हब एंड स्पोक मॉडल के माध्यम से जोड़ने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था में एसजीपीजीआई की मुख्य गहन चिकित्सा टीमें वास्तविक समय में निगरानी और क्रिटिकल केयर बेड के बेहतर आवंटन में सहयोग करेंगी। हब एंड स्पोक मॉडल में एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान को केंद्रीय केंद्र के रूप में रखा जाता है, जबकि उससे जुड़े अन्य अस्पतालों को विशेषज्ञ सहायता और समन्वय उपलब्ध कराया जाता है। अयोध्या मेडिकल कॉलेज के संदर्भ में इस व्यवस्था का उद्देश्य आईसीयू संसाधनों के प्रबंधन और गंभीर मरीजों की देखभाल में संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

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स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ मेडिकल कॉलेज में कार्यरत कर्मचारियों की उपलब्धता को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है। घोषणा के अनुसार, फैकल्टी, नर्सिंग स्टाफ और सहायक पैरामेडिकल टीमों के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने का वादा किया गया है। इस योजना को चौबीसों घंटे आपातकालीन और गंभीर चिकित्सा सेवाओं के संचालन से जोड़ा गया है। अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के आवास की व्यवस्था से संबंधित निर्माण योजना, क्षमता और समयसीमा का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए ब्रजेश पाठक ने अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के संदर्भ में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। अयोध्या धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का प्रमुख शहर है। यहां स्थानीय आबादी के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में आपातकालीन चिकित्सा, हृदय रोग उपचार, गहन चिकित्सा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से संबंधित सुविधाओं का विस्तार स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का महत्वपूर्ण विषय है। इसी संदर्भ में राजर्षि दशरथ ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजनाएं प्रस्तुत की गईं।

आईएसआईसीपीएम 2026 के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य शैक्षणिक विषय पेरिऑपरेटिव मेडिसिन रहा। पेरिऑपरेटिव मेडिसिन में मरीज की सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान और सर्जरी के बाद की चिकित्सा देखभाल को एक समन्वित व्यवस्था के तहत शामिल किया जाता है। इसका प्रमुख सिद्धांत एक क्लिनिक, एक टीम और एक उपचार योजना के माध्यम से मरीज की देखभाल करना है। इस दृष्टिकोण में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सर्जरी से जुड़ी पूरी उपचार प्रक्रिया में मरीज की सुरक्षा और चिकित्सा प्रबंधन पर ध्यान दिया जाता है। सम्मेलन में इसी मरीज-केंद्रित चिकित्सा पद्धति, उपचार समन्वय और बेहतर क्लिनिकल परिणामों पर चर्चा की गई।

2 से 4 अक्टूबर तक आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से 200 से अधिक चिकित्सकों, विशेषज्ञों और पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट्स ने भाग लिया। सम्मेलन का आयोजन एसजीपीजीआई लखनऊ के एनेस्थिसियोलॉजी एवं इंटेंसिव केयर विभाग ने अयोध्या मेडिकल कॉलेज के सहयोग से किया। 

सम्मेलन के पहले दिन पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड और एडवांस्ड एयरवे मैनेजमेंट पर विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इन प्रशिक्षण सत्रों में चिकित्सकों को जटिल क्लिनिकल परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों की जानकारी और अभ्यास कराया गया। वैज्ञानिक सत्रों में सटीक रक्त प्रबंधन, छाती संबंधी चिकित्सा, बाल चिकित्सा सर्जरी में सुरक्षा और मरीजों की निगरानी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्टिंग से संबंधित लाइव मशीन मॉड्यूल और आधुनिक सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

सम्मेलन में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज ऑफ एनेस्थिसियोलॉजिस्ट्स के अध्यक्ष-निर्वाचित डॉ. जे. बालावेन्कटसुब्रमण्यम ने प्रतिष्ठित मेमोरियल व्याख्यान दिया। उनके व्याख्यान में बहु-विषयक और उपचार के परिणामों पर आधारित पेरिऑपरेटिव मेडिसिन की दिशा में संरचनात्मक बदलाव पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में एनेस्थीसिया और गहन चिकित्सा से संबंधित आधुनिक उपचार पद्धतियों, अनुसंधान और चिकित्सा शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

समापन समारोह के दौरान ब्रजेश पाठक ने विजेता पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट्स और चयनित फैकल्टी सदस्यों को शैक्षणिक पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए। इन पुरस्कारों में पोस्ट ग्रेजुएट वैज्ञानिक प्रश्नोत्तरी, मंचीय शोध प्रस्तुति और क्लिनिकल एब्स्ट्रैक्ट श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। समारोह में एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आर.के. धीमन, अयोध्या मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर दिनेश सिंह मर्टोलिया, एसजीपीजीआई के एनेस्थिसियोलॉजी एवं इंटेंसिव केयर विभागाध्यक्ष और आयोजन अध्यक्ष प्रोफेसर संजय धीराज, आयोजन सचिव प्रोफेसर पुनीत गोयल तथा संयुक्त आयोजन सचिव प्रोफेसर जे.पी. तिवारी उपस्थित रहे।

वैज्ञानिक कार्यक्रम के साथ सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। आयोजकों की ओर से 250 से अधिक प्रतिभागियों के लिए श्रीराम जन्मभूमि में रामलला के दर्शन और सूरज कुंड सहित अयोध्या के ऐतिहासिक मंदिरों के भ्रमण की व्यवस्था की गई। राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, गहन चिकित्सा और पेरिऑपरेटिव मेडिसिन से जुड़े शैक्षणिक सत्रों के साथ हुआ।