राम मंदिर में दान से जुड़े विवाद के बाद अब उत्तराखंड की बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक नए विवाद के केंद्र में है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि समिति के कुछ सदस्यों को टीए/डीए के नाम पर नियमों के विपरीत लाखों रुपये का भुगतान किया गया।
प्रेस वार्ता में नेगी ने कहा कि यह भुगतान श्रद्धालुओं के दान से संचालित मंदिर कोष से किया गया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। नेगी के अनुसार, आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी में मंदिर एक्ट की धारा 26 (च) का उल्लेख किया गया है। इसके तहत समिति के सदस्यों को केवल समिति के कार्यों से संबंधित आधिकारिक यात्रा या बैठक में भाग लेने पर ही यात्रा एवं दैनिक भत्ता दिए जाने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि सदस्यों को विधायकों के समान प्रतिदिन 6,000 रुपये का दैनिक भत्ता तथा चार रुपये प्रति किलोमीटर की दर से यात्रा व्यय दिया जाता है। विकेश सिंह नेगी का दावा है कि वर्तमान बोर्ड का गठन पिछले वर्ष जून में हुआ था। इसके बाद लगभग आठ महीनों की अवधि में बोर्ड की केवल एक बैठक आयोजित हुई, लेकिन कई सदस्यों ने विभिन्न अवसरों पर टीए-डीए का भुगतान प्राप्त किया।
उनका आरोप है कि कई भुगतानों को समिति के अधिकृत कार्यों की श्रेणी में दिखाया गया, जबकि वे आधिकारिक बोर्ड बैठकों से संबंधित नहीं थे। नेगी ने आरोप लगाया कि फरवरी में बसंत पंचमी के अवसर पर नरेंद्रनगर राजमहल में आयोजित उस कार्यक्रम में भी कई सदस्यों ने उपस्थिति दिखाकर भत्ते प्राप्त किए, जिसमें बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित की जाती है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम परंपरागत रूप से टिहरी राजपरिवार द्वारा आयोजित किया जाता है और इसका मंदिर समिति की बोर्ड बैठक से सीधा संबंध नहीं है। प्रेस वार्ता के दौरान नेगी ने दावा किया कि कुछ सदस्यों की केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर किराए का भुगतान भी मंदिर कोष से किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के सदस्य डॉ. विनीत पोस्ती को केदारनाथ, बदरीनाथ, तुंगनाथ के कपाट बंद होने तथा मद्महेश्वर मेले में भागीदारी के लिए भी भुगतान किया गया। इसी प्रकार एक अन्य सदस्य प्रह्लाद पुष्पाण के संबंध में भी विभिन्न धाम यात्राओं के नाम पर भुगतान का आरोप लगाया गया।
नेगी ने दावा किया कि प्रह्लाद पुष्पाण की मध्यमहेश्वर यात्रा से जुड़ी फाइल पर लेखा अनुभाग ने यह आपत्ति दर्ज की थी कि बिल अध्यक्ष द्वारा सत्यापित नहीं है। इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया। उन्होंने इसे वित्तीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताते हुए जांच की मांग की।
विकेश सिंह नेगी ने कहा कि मंदिर एक्ट के अनुसार अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य लोकसेवक की श्रेणी में आते हैं। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन कर भुगतान हुआ है तो मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत होनी चाहिए।
यह पहला अवसर नहीं है जब बीकेटीसी को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी विकेश सिंह नेगी मंदिर कोष से वीआईपी श्रद्धालुओं की आवभगत पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण पर आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दर्शाकर भुगतान लिया गया तथा अपने आवास को कार्यालय दिखाकर प्रतिमाह धनराशि प्राप्त की गई। नेगी ने यह दावा भी किया कि मंदिर कोष से 11 लाख रुपये तीर्थ पुरोहितों में बांटे जाने का मामला भी सामने आया था।
इस पूरे मामले में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। विकेश सिंह नेगी ने कहा कि यदि अध्यक्ष या मंदिर समिति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है तो उसे भी सार्वजनिक किया जाएगा।