वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूती के संकेत दिए हैं। हालांकि बढ़ती महंगाई, व्यापार घाटे में इजाफा और वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने रह सकते हैं। यह आकलन बजाज ब्रोकिंग प्राइव की अगस्त 2026 मासिक आउटलुक रिपोर्ट में सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार आईआईपी ने पहली तिमाही में औसतन 5.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की, जबकि सेवा उत्पादन सूचकांक ने शुरुआती दो महीनों में औसतन 15.3 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कमोडिटी कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर भारत में भी दिखाई देने लगा है। जून 2026 में खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर जाकर 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार महंगे कच्चे तेल ने आयात बिल बढ़ाया, जिससे जून 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर कुल व्यापार घाटा 15.32 अरब डॉलर रहा, जो आठ महीने का उच्च स्तर बताया गया है। पहली तिमाही में कुल व्यापार घाटा लगभग दोगुना होकर 33.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में अल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन जुलाई के अंत तक वर्षा की कमी घटकर लगभग 14 प्रतिशत रह गई। इससे खाद्य महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना बनी है।
रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय की जुलाई आर्थिक समीक्षा में भी यह संकेत दिया गया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। हालांकि कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी प्रमुख जोखिम बना हुआ है। कंपनियों की पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों में भी अधिकांश क्षेत्रों में राजस्व वृद्धि देखने को मिली, लेकिन बढ़ती लागत के कारण मुनाफे पर दबाव बना रहा।
रिपोर्ट में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं, चुनिंदा सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सेवा कंपनियों, पूंजीगत वस्तुओं और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के प्रदर्शन को अपेक्षा से बेहतर बताया गया है।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर बनी रही। कई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और निजी बैंकों ने खुदरा एवं एमएसएमई ऋण वितरण के दम पर बेहतर लाभ दर्ज किया। वहीं पूंजीगत वस्तुओं और अवसंरचना क्षेत्र को सरकारी पूंजीगत व्यय और मजबूत ऑर्डर बुक का लाभ मिला।
मिडकैप सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में भी बेहतर वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बड़े आईटी समूहों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत सीमित रहा। रिपोर्ट में एयरलाइन, फ्रेगरेंस एवं फ्लेवर तथा रीसाइक्लिंग क्षेत्र के प्रदर्शन का भी सकारात्मक उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के बाजार विश्लेषण के अनुसार वैश्विक अस्थिरता के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में अधिकांश सेक्टोरल सूचकांकों ने सकारात्मक रिटर्न दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निफ्टी-50 का एक वर्षीय अग्रिम मूल्यांकन अपने 10 वर्षीय औसत से नीचे आया है, जबकि एनएसई-500 का मूल्यांकन औसत से ऊपर बना हुआ है, जिसका एक कारण मिडकैप शेयरों में तेजी भी रही।