>श्रीबांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर को लेकर चल रहा विरोध शनिवार को उस समय और भड़क गया, जब नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में पहले से जुटे गोस्वामी समाज और स्थानीय व्यापारियों ने काले कपड़े और बैनर के साथ जमकर विरोध प्रदर्शन किया और "कॉरिडोर हाय-हाय" के नारे लगाए। इस दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि मंदिर प्रशासन को गर्भगृह का पर्दा बंद करना पड़ा, जिससे मंत्री ठाकुर जी के दर्शन से वंचित रह गए।
>50 दिन से चल रहा विरोध, अब हुआ उग्र
>कॉरिडोर और न्यास गठन के विरोध में गोस्वामी समाज और व्यापारी वर्ग बीते 50 दिनों से धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह परियोजना न केवल मंदिर की परंपरा और संस्कृति को नुक़सान पहुंचाएगी, बल्कि स्थानीय गलियों, दुकानों और सैकड़ों परिवारों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर देगी।
>पुलिस पर धक्का-मुक्की और अभद्रता के आरोप
>मंत्री के आगमन के समय प्रदर्शनकारी महिलाओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई। आरोप है कि सीओ संदीप सिंह ने प्रदर्शनकारियों के हाथ से पोस्टर छीना और गोस्वामी समाज के बृजेंद्र किशोर को धक्का दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। महिलाओं ने पुलिस पर अभद्रता और विरोध को जबरन दबाने का आरोप लगाया।
>मंत्री को नहीं मिला पारंपरिक सम्मान
>विवाद इतना गहराया कि पुजारियों ने गर्भगृह बंद कर दिया और परंपरागत रूप से दिए जाने वाले पटुका और प्रसाद भी मंत्री को नहीं दिए गए। गोस्वामी समाज ने पहले ही मंदिर में वीआईपी स्वागत बंद करने की घोषणा कर दी थी, जो शनिवार को साकार होती दिखी। विरोध इतना तीव्र था कि मंत्री को मंदिर के गेट नंबर 4 से बाहर निकालना पड़ा, जहां भीड़ ने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी की।
>मंत्री ने दी सफाई, कहा: जनता की सहमति से ही होगा कोई निर्णय
>बाहरी दबाव और विरोध को देखते हुए एके शर्मा ने मंदिर के बाहर पत्रकारों से कहा कि कॉरिडोर जैसी योजनाएं जनता के हित में बनाई जाती हैं और किसी की सहमति के बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने चार महिलाओं से मिलकर उनकी आपत्तियां सुनीं और सभी हितधारकों को भरोसा दिलाया कि सांस्कृतिक विरासत को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
>बिहार मुफ्त बिजली बयान पर विवाद
>अपने मथुरा दौरे में एक अन्य बयान पर मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि "जब बिजली आएगी तभी तो फ्री मिलेगी, नहीं आएगी तो कैसी फ्री?" उनका यह बयान विवाद का कारण बना, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय किसी की निंदा नहीं बल्कि बिजली आपूर्ति की हकीकत को उजागर करना था।