बाराबंकी जिले के सिरौली गौसपुर तहसील स्थित किंतूर गांव में इस वर्ष ईद का त्योहार नहीं मनाया गया। ग्रामीणों ने शोक के चलते सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया, जिसके बाद गांव में सामान्य उत्सव का माहौल देखने को नहीं मिला।
स्थानीय लोगों के अनुसार किंतूर गांव का ईरान से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। मान्यता है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के पूर्वजों का संबंध इसी गांव से था। बताया जाता है कि उनके दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्म किंतूर में हुआ था और बाद में वे 19वीं सदी में इराक और फिर ईरान चले गए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी ऐतिहासिक जुड़ाव के कारण गांव के लोग ईरान से जुड़े घटनाक्रमों को भावनात्मक रूप से देखते हैं। हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन की खबरों के बाद गांव में शोक का माहौल बताया गया है।
इसी संदर्भ में गांव के लोगों और संबंधित परिवारों ने इस बार ईद का त्योहार नहीं मनाने का निर्णय लिया। गांव में न तो पारंपरिक उत्सव हुआ और न ही सामान्य चहल-पहल देखने को मिली।
किंतूर गांव लंबे समय से ईरान की इस्लामी क्रांति और उससे जुड़े ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के साथ अपने संबंधों के कारण चर्चा में रहा है। ग्रामीणों द्वारा लिया गया यह निर्णय स्थानीय परंपराओं और भावनात्मक जुड़ाव के आधार पर लागू किया गया।