बाराबंकी में खनन ठेकेदारों के विवाद में एक पक्ष पर केस, पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप

27 Aug 2026

बाराबंकी में खनन के काम से जुड़े दो ठेकेदारों के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद होने का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई। इसके बाद बाराबंकी कोतवाली पुलिस ने विनोद और उनके साथियों को हिरासत में लिया तथा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

विनोद के परिवार का आरोप है कि विवाद में उनके पक्ष के लोग भी घायल हुए थे, लेकिन पुलिस ने मामले में एकतरफा कार्रवाई की। परिवार ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने मौके पर विनोद का फोन ले लिया और उनके वाहनों को जब्त कर लिया। परिवार के अनुसार, कई घंटों तक उन्हें विनोद के हिरासत में लिए जाने की जानकारी नहीं दी गई।

मामले को लेकर विनोद के वकील ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, रातभर उन्हें विनोद से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। परिवार और वकील की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित पुलिस पक्ष का बयान उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, विनोद और जयवीर सिंह के बीच पैसों को लेकर विवाद हुआ था। बताया गया है कि बातचीत के दौरान मामला बढ़ गया और विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और विनोद तथा उनके साथियों को हिरासत में ले लिया।

विनोद के परिवार का कहना है कि मारपीट की घटना में उनके पक्ष के लोग भी घायल हुए थे। परिवार के अनुसार, इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई मुख्य रूप से विनोद पक्ष के खिलाफ हुई।

हालांकि, उपलब्ध विवरण में दूसरे पक्ष की ओर से घटना को लेकर कोई स्वतंत्र बयान या पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए दूसरे पक्ष की स्थिति और उसके आरोप इस समाचार में उपलब्ध नहीं जोड़े जा रहे हैं।

विनोद के परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मामले में दोनों पक्षों के साथ समान कार्रवाई नहीं की। परिवार के मुताबिक, विनोद को हिरासत में लेने के साथ उनका फोन भी मौके पर ले लिया गया और कुछ वाहन जब्त किए गए।

परिवार का यह भी आरोप है कि विनोद को हिरासत में लिए जाने के बाद काफी समय तक उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। बाद में जानकारी मिलने पर परिवार के लोग कोतवाली पहुंचे।

परिवार के अनुसार, उस दौरान दूसरे पक्ष के लोगों के साथ भी उनका विवाद हुआ और मारपीट की स्थिति बनी, लेकिन पुलिस ने इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। परिवार का दावा है कि दूसरे पक्ष को वहां से तहरीर लेकर भेज दिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं हो सकी है।

विनोद के वकील के अनुसार, उन्होंने रात के दौरान पुलिस से संपर्क कर विनोद से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। वकील का दावा है कि थाना प्रभारी ने यह कहते हुए विनोद को रातभर थाने में रखने की बात कही कि यदि जयवीर के साथ हुई मारपीट का वीडियो कहीं प्रसारित हो गया तो मामला बढ़ सकता है।

वकील के मुताबिक, उन्हें यह भी बताया गया था कि सुबह विनोद का चालान कर दिया जाएगा। परिवार की ओर से यह दावा भी किया गया है कि विनोद के वकीलों से उस समय तहरीर नहीं ली गई।

अगली सुबह वकीलों ने दोबारा थाना प्रभारी से संपर्क कर शिकायत या तहरीर देने का प्रयास किया। परिवार का आरोप है कि उस समय थाना प्रभारी ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और ड्यूटी अधिकारी के माध्यम से मुकदमा दर्ज होने की जानकारी दी गई।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ड्यूटी अधिकारी के माध्यम से विनोद के परिवार और वकीलों को बताया गया कि विनोद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बताई गई धाराओं में धारा 115(2), 352, 351(3), 117, 329(3), 109(1), 3(5) और 7 का उल्लेख किया गया है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध विवरण में इन धाराओं की पुलिस या न्यायालय द्वारा जारी विस्तृत व्याख्या अथवा प्राथमिकी की प्रमाणित प्रति शामिल नहीं है। इसलिए मुकदमे की धाराओं का उल्लेख उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर किया जा रहा है। विनोद के परिवार ने थाना प्रभारी सुधीर सिंह पर आरोप लगाया है कि दूसरे पक्ष के साथ उनके कथित करीबी संबंधों के कारण कार्रवाई एकतरफा हुई।

परिवार का दावा है कि थाना प्रभारी ने उन्हें रातभर अपने प्रभाव और पहुंच को लेकर धमकी दी। परिवार के अनुसार, उन्हें यह कहा गया कि शिकायत कहीं भी की जाए, कार्रवाई अंततः विनोद के खिलाफ ही होगी। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है। पुलिस अधिकारी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

परिवार की ओर से सामने रखे गए प्रमुख आरोपों के अनुसार, विवाद के दौरान विनोद पक्ष के लोग भी घायल हुए, लेकिन उनके खिलाफ ही पुलिस कार्रवाई की गई। परिवार ने दावा किया कि विनोद को हिरासत में लेने के बाद उनका फोन और वाहन पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए।

परिवार का यह भी आरोप है कि उन्हें काफी देर तक विनोद की हिरासत की जानकारी नहीं दी गई। कोतवाली पहुंचने पर दूसरे पक्ष के लोगों के साथ हुए कथित विवाद में भी पुलिस ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा, परिवार ने थाना प्रभारी पर दूसरे पक्ष के साथ नजदीकी संबंध होने का आरोप लगाया है। इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

उपलब्ध सूचना के अनुसार, विनोद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। परिवार और उनके वकील पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और उनका कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायतों तथा चोटों को समान रूप से दर्ज किया जाना चाहिए था। मामले में आगे की कार्रवाई, विवेचना और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।