महुआ मोइत्रा अब मेरी भाभी हैं - बोले निशिकांत दुबे

05 May 2026

 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के एक पुराने एक्स पोस्ट को लेकर तंज कसा है, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

 

मैंने महुआ जी के इस ट्वीट पर गहन चिंतन किया । पिनाकी मिश्रा जी मेरे पुराने दोस्त हैं इसलिए महुआ मोइत्रा जी मेरी अब भाभी हैं,बंगाल में @AITCofficial के चुनाव हारने के बाद मैंने बांग्लादेश के नव नियुक्त राजदूत @DinTri जी से आग्रह किया है कि महुआ भाभी के लिए ढाका में जमदानी साडी का… pic.twitter.com/0WDuUE8evL

— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) May 5, 2026

 

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद दुबे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओडिशा के वरिष्ठ नेता पिनाकी मिश्रा उनके पुराने मित्र हैं, इसलिए महुआ मोइत्रा अब उनकी ‘भाभी’ हैं। उन्होंने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि उन्होंने बांग्लादेश के नव नियुक्त राजदूत से अनुरोध किया है कि ढाका में महुआ मोइत्रा के लिए जमदानी साड़ी का शोरूम या बुनकर केंद्र स्थापित किया जाए। दुबे ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि इस व्यवस्था से लोगों को सीधे महुआ मोइत्रा की दुकान से साड़ी मिल सकेगी और किसी अन्य से पूछने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उनके इस बयान को राजनीतिक तंज के रूप में देखा जा रहा है।

 

दरअसल, यह प्रतिक्रिया महुआ मोइत्रा के 1 मई के एक एक्स पोस्ट के जवाब में आई है। उस पोस्ट में मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि बीजेपी के कुछ सांसद उन्हें बांग्लादेशी और रोहिंग्या बताते हैं, जबकि उनके परिवार के सदस्य बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान ढाकाई जमदानी साड़ियों की जानकारी लेते हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में इसे बीजेपी का ‘असली चेहरा’ बताया था। इसी संदर्भ को लेकर निशिकांत दुबे ने पलटवार किया और मोइत्रा के बयान पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जिससे दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है।

 

इस बीच, पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया है। घोषित परिणामों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी भवानीपुर सीट नहीं बचा सकीं और उन्हें सुभेंदु अधिकारी ने पराजित किया। चुनावी नतीजों के बाद जहां एक ओर सत्ता परिवर्तन को लेकर चर्चा जारी है, वहीं दूसरी ओर नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तंज का दौर भी जारी है, जो राजनीतिक माहौल को और गरमाता दिख रहा है।