बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद 5 बड़े मुद्दे केंद्र में, बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती

05 May 2026

 

पश्चिम बंगाल में लंबे समय बाद हुए सत्ता परिवर्तन ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। तृणमूल कांग्रेस की 15 वर्षों की सरकार के बाद भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के साथ ही उन मुद्दों पर फोकस बढ़ गया है, जो पिछले डेढ़ दशक से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। चुनाव परिणामों में बीजेपी को 207 सीटों पर जीत मिली, जिसके बाद राज्य में ‘डबल इंजन सरकार’ की अवधारणा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

 

राज्य में अवैध घुसपैठ, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पांच प्रमुख मुद्दे अब नई सरकार के सामने चुनौती के रूप में खड़े हैं।

 

पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में अवैध प्रवासन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में जनसंख्या संरचना में बदलाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने चिंता जताई है। बीजेपी ने चुनाव के दौरान सीमा सुरक्षा मजबूत करने और अवैध घुसपैठियों की पहचान कर कार्रवाई करने का वादा किया है।

 

कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा भी चुनावी मुद्दों में प्रमुख रही। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और संदेशखाली जैसे मामलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। चुनाव के दौरान इन घटनाओं से जुड़े परिवारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी मिला। बीजेपी ने राज्य में सख्त कानून व्यवस्था लागू करने और अपराध पर नियंत्रण का आश्वासन दिया है।

 

भ्रष्टाचार और सिंडिकेट संस्कृति का मुद्दा भी लगातार चर्चा में रहा। शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बड़ी संख्या में नियुक्तियों को रद्द किए जाने के बाद यह मुद्दा और प्रमुख हो गया। विपक्षी दलों ने ‘कट-मनी’ और स्थानीय स्तर पर सिंडिकेट के प्रभाव को लेकर आरोप लगाए। बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और ऐसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने की बात कही है।

 

रोजगार और औद्योगिक विकास का सवाल भी राज्य के सामने प्रमुख चुनौती है। विभिन्न रिपोर्टों में बेरोजगारी दर को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जबकि निवेश और उद्योगों के पलायन को लेकर भी चिंता व्यक्त की जाती रही है। बीजेपी ने उद्योगों को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और वित्तीय सहायता योजनाओं के जरिए रोजगार सृजन का वादा किया है।

 

इसके साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं के पूर्ण क्रियान्वयन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। आवास, उज्ज्वला और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच को लेकर पूर्व में सवाल उठते रहे हैं। नई सरकार ने इन योजनाओं को राज्य में पूरी तरह लागू करने का भरोसा जताया है।

 

चुनावी आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी का वोट शेयर 2021 के 38 प्रतिशत से बढ़कर 45.64 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि तृणमूल कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटकर 40.80 प्रतिशत रह गया। यह बदलाव राज्य की राजनीतिक प्राथमिकताओं में परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है।