उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की कवायद में जुटी है। छह क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब पार्टी के भीतर क्षेत्रीय प्रभारियों के चयन को लेकर मंथन तेज हो गया है। संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस बार नियुक्तियों में केवल संगठनात्मक अनुभव ही नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को भी प्रमुख आधार बनाया जा सकता है।
भाजपा ने संगठनात्मक सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश को काशी, गोरखपुर, अवध, कानपुर, ब्रज और पश्चिम क्षेत्र में विभाजित किया है। इन छह क्षेत्रों के अंतर्गत कुल 98 संगठनात्मक जिले आते हैं। क्षेत्रीय प्रभारी का पद संगठन और चुनावी रणनीति, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि क्षेत्रीय अध्यक्ष के साथ मिलकर वही चुनावी तैयारियों और संगठन विस्तार की जिम्मेदारी संभालता है।
पार्टी ने वर्ष 2023 के बाद सभी छह क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए थे। अब संगठन की अगली महत्वपूर्ण प्रक्रिया क्षेत्रीय प्रभारियों की नियुक्ति मानी जा रही है। भाजपा परंपरागत रूप से प्रदेश महामंत्रियों को क्षेत्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी देती रही है, हालांकि पिछले कार्यकाल में कुछ अपवाद भी देखने को मिले थे।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार प्रत्येक क्षेत्र की सामाजिक संरचना और चुनावी जरूरतों के अनुसार प्रभारियों का चयन किया जा सकता है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
71 विधानसभा सीटों वाले पश्चिम क्षेत्र को भाजपा के लिए चुनावी दृष्टि से अहम माना जाता है। पिछले कार्यकाल में यहां सतेंद्र सिसौदिया क्षेत्रीय अध्यक्ष और सुभाष यदुवंश क्षेत्रीय प्रभारी रहे थे। उनसे पहले जेपीएस राठौर और विजय बहादुर पाठक भी यह जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस बार पश्चिम क्षेत्र में सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश महामंत्री राजेश चौधरी के नाम पर चर्चा चल रही है। इसके अलावा राम प्रताप सिंह और अभिजात मिश्रा के नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का हिस्सा हैं।
65 विधानसभा सीटों वाले ब्रज क्षेत्र में भी नए क्षेत्रीय प्रभारी को लेकर मंथन जारी है। पहले यहां संतोष सिंह, गोविंद नारायण शुक्ल, अशोक कटारिया और अश्विनी त्यागी जैसी हस्तियां प्रभारी रह चुकी हैं। इस बार दिलीप पटेल और गीता शाक्य के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी संभावित नाम की पुष्टि नहीं की गई है।
71 विधानसभा सीटों वाले काशी क्षेत्र में पहले अमरपाल मौर्य और गोविंद नारायण शुक्ल क्षेत्रीय प्रभारी की भूमिका निभा चुके हैं। संगठन के भीतर चर्चा है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष की सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इस बार प्रभारी के चयन में अलग सामाजिक वर्ग को प्रतिनिधित्व देने पर विचार किया जा सकता है।
82 विधानसभा सीटों वाले अवध क्षेत्र में पूर्व में संजय राय और अमरपाल मौर्य क्षेत्रीय प्रभारी रह चुके हैं। इस बार गीता शाक्य और राम प्रताप सिंह के नाम संगठन के भीतर चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि इन नामों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
52 विधानसभा सीटों वाले कानपुर क्षेत्र में पहले अनूप गुप्ता, प्रियंका रावत और विजय बहादुर पाठक क्षेत्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार संगठन में सामाजिक संतुलन के तहत अभिजात मिश्रा के नाम पर भी विचार किए जाने की चर्चा है।
62 विधानसभा सीटों वाले गोरखपुर क्षेत्र में अनुसूचित जाति समुदाय की उल्लेखनीय आबादी है। ऐसे में पूर्व सांसद उपेंद्र रावत और शंकर लाल लोधी के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में बताए जा रहे हैं। इससे पहले गोविंद नारायण शुक्ल, अनूप गुप्ता और पंकज सिंह इस क्षेत्र के प्रभारी रह चुके हैं।
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में क्षेत्रीय प्रभारी को क्षेत्रीय अध्यक्ष के साथ समन्वय स्थापित करने, संगठन विस्तार, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, चुनावी तैयारियों की समीक्षा और संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। विधानसभा चुनाव से पहले यह पद रणनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।