ब्रिक्स सम्मेलन से पहले दिल्ली में आवारा पशुओं पर विशेष अभियान, टीमें तैनात

08 Sep 2026

नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियों के बीच दिल्ली में आवारा पशुओं को लेकर विशेष अभियान शुरू किया गया है। सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी मेहमानों के आवागमन वाले प्रमुख मार्गों, आयोजन स्थलों और उनके ठहरने वाले होटलों के आसपास आवारा पशुओं की मौजूदगी रोकने के लिए सिविक एजेंसियों की टीमें तैनात की गई हैं।

अभियान के तहत सड़कों पर घूमने वाले बेघर गोवंश और आवारा कुत्तों को पकड़कर निर्धारित गोशालाओं और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। वहीं, दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में मौजूद बंदरों को पकड़ने के बाद वन क्षेत्रों में छोड़े जाने की योजना पर भी संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है।

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आयोजन स्थलों, मेहमानों के ठहरने वाले होटलों और उनके आवागमन वाले प्रमुख मार्गों को आवारा पशुओं से मुक्त रखने की तैयारी की गई है। इसके लिए सिविक एजेंसियों ने इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई है। भारत मंडपम और इसके आसपास के क्षेत्र में अभियान शुरू किया जा चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां से अब तक करीब 50 आवारा कुत्तों को हटाया जा चुका है। अभियान केवल आयोजन स्थल तक सीमित नहीं रहेगा। होटल, पार्किंग क्षेत्र, प्रमुख चौराहों और उन रास्तों पर भी विशेष नजर रखी जाएगी, जहां से सम्मेलन में शामिल होने वाले मेहमानों के काफिले गुजरेंगे।

एमसीडी के एक अधिकारी के अनुसार, सम्मेलन के मद्देनजर प्रमुख मार्गों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। किसी प्रमुख मार्ग या संवेदनशील स्थान पर आवारा पशु दिखाई देने पर उसे हटाने के लिए टीम भेजने की व्यवस्था की गई है। सड़कों पर घूमने वाले बेघर गोवंश और आवारा कुत्तों को पकड़कर निर्धारित गोशालाओं तथा अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इस कार्रवाई का उद्देश्य सम्मेलन के दौरान मेहमानों के आवागमन वाले मार्गों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी को रोकना है।

अभियान में बंदरों को भी शामिल किया गया है। दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में मौजूद बंदरों को पकड़ने के बाद वन क्षेत्रों में छोड़े जाने की योजना है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है। बंदरों की मौजूदगी वाले स्थानों की पहचान करने और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अभियान के तहत दिल्ली के कितने क्षेत्रों में बंदरों को पकड़ा गया है या कितने बंदरों को वन क्षेत्रों में छोड़ा गया है।

सिविक एजेंसियों की निगरानी केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। सम्मेलन में आने वाले मेहमानों के ठहरने वाले होटल, पार्किंग क्षेत्र और प्रमुख चौराहे भी अभियान के दायरे में रखे गए हैं। इन स्थानों पर भी आवारा पशुओं की मौजूदगी पर नजर रखी जाएगी। अधिकारियों के निर्देश के अनुसार, संवेदनशील स्थानों की पहचान की जा रही है, ताकि सम्मेलन के दौरान किसी मार्ग पर अचानक आवारा पशु पहुंचने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इस व्यवस्था में खास तौर पर उन रास्तों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनका इस्तेमाल सम्मेलन में आने वाले मेहमानों के काफिले के लिए किया जाना है।

अधिकारियों की ओर से टीमों को संवेदनशील स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सम्मेलन के दौरान किसी प्रमुख मार्ग पर अचानक आवारा पशुओं की मौजूदगी से यातायात प्रभावित न हो। इसके लिए निगरानी टीमों को प्रमुख मार्गों पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए तैयार रखा गया है। आवारा पशुओं के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति को रोकने के लिए संबंधित एजेंसियां सम्मेलन के दौरान भी कार्रवाई जारी रखने की तैयारी में हैं।

भारत मंडपम और आसपास के इलाकों में अभियान पहले ही शुरू किया जा चुका है। यहां से करीब 50 आवारा कुत्तों को हटाए जाने की जानकारी दी गई है। इसके बाद सम्मेलन से जुड़े अन्य प्रमुख मार्गों और स्थानों पर भी निगरानी जारी रखने की तैयारी है। सिविक एजेंसियों की टीमें आयोजन स्थलों के साथ-साथ उन मार्गों पर भी नजर रखेंगी, जहां से विदेशी मेहमानों का आवागमन होगा।

इस अभियान में आवारा कुत्तों और बेघर गोवंश को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कार्रवाई शामिल है, जबकि बंदरों के मामले में उन्हें पकड़कर वन क्षेत्रों में छोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।