1133 दिनों की सुनवाई, 127 पेशियां... आखिरकार बृजभूषण शरण सिंह सभी आरोपों से बरी, कोर्ट के फैसले के बाद बोले- 'जो हुआ, सो हुआ'

03 Aug 2026

करीब तीन वर्षों तक देश की सबसे चर्चित खेल और कानूनी लड़ाइयों में शामिल रहे यौन उत्पीड़न मामले में सोमवार को बड़ा न्यायिक फैसला आया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

करीब 1133 दिनों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इस मामले में 127 बार सुनवाई हुई। अदालत ने 2 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया गया।

महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद वर्ष 2023 में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामला सामने आने के बाद यह देशभर में चर्चा का विषय बन गया और खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी इसकी व्यापक चर्चा हुई।

सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया।

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अदालत से बाहर निकलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने फैसले का स्वागत किया और कहा, "आज कोर्ट ने बाइज्जत मुझे बरी किया है। मैंने उस दिन कहा था कि मैं स्वतः फांसी से लटक जाऊंगा। मगर आज मैं बाइज्जत बरी हो गया।"

जब मीडिया ने उनसे आरोप लगाने वालों के बारे में प्रतिक्रिया पूछी तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, "जो हुआ, सो हुआ।" फैसला आने के बाद उनके समर्थकों ने अदालत परिसर के बाहर खुशी जताई।

यह मामला वर्ष 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद देश के कई शीर्ष पहलवान खुलकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके कई खिलाड़ियों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। विरोध प्रदर्शन लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा।

आरोप सामने आने के बाद पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई सप्ताह तक धरना दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार किया जाए और उन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ से हटाया जाए।

इस आंदोलन में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया सहित कई प्रमुख पहलवान शामिल रहे। आंदोलन के दौरान नए संसद भवन की ओर मार्च निकालने की कोशिश में कई खिलाड़ियों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। उस समय यह मामला राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा और विभिन्न खेल संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। इसी आधार पर अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह फैसला उस बहुचर्चित मामले का न्यायिक निष्कर्ष है, जिसने पिछले लगभग तीन वर्षों के दौरान खेल जगत, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श में व्यापक चर्चा बटोरी।