एक पुराना मुकदमा, एक सड़क हादसा और वायरल खबरें; बुलंदशहर पुलिस ने दी सफाई

01 Oct 2026

बुलंदशहर। सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में प्रसारित कुछ खबरों को लेकर बुलंदशहर पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस के अनुसार, जिन खबरों पर स्पष्टीकरण दिया गया है, उनमें दो अलग-अलग प्रकरणों को आपस में जोड़कर जानकारी प्रसारित की जा रही है। पुलिस ने दोनों मामलों का अलग-अलग घटनाक्रम सामने रखते हुए एफआईआर, विवेचना और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए जाने से संबंधित जानकारी दी है।

पुलिस ने बताया कि एक मामला वर्ष 2021 का है, जबकि दूसरा प्रकरण 19 अगस्त 2026 को हुई सड़क दुर्घटना से संबंधित है। दोनों मामलों का संबंध थाना खुर्जा नगर क्षेत्र से है। पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में विवेचना पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र न्यायालय में भेजे जा चुके हैं।

बुलंदशहर पुलिस के अनुसार, पहला मामला वर्ष 2021 में थाना खुर्जा नगर क्षेत्र में हुई घटना से संबंधित है। इस मामले में मु0अ0सं0-55/21 के तहत भारतीय दंड संहिता की धाराओं 452, 323, 504, 506 और 354 में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण में विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। पुलिस के स्पष्टीकरण में इस मामले को 19 अगस्त 2026 को हुई सड़क दुर्घटना से अलग प्रकरण बताया गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों के घटनाक्रम और कानूनी कार्रवाई को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।

 

दूसरा मामला 19 अगस्त 2026 को हुई सड़क दुर्घटना से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, इस दुर्घटना में वादिनी को सामान्य चोट आई थी। इस घटना के संबंध में थाना खुर्जा नगर में मु0अ0सं0-915/26 दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में भी विवेचना पूरी की जा चुकी है और आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना से संबंधित मामले को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में घटनाक्रम को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा था। इसी के संबंध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने और विवेचना के दौरान की गई कार्रवाई की जानकारी दी है।

पुलिस के स्पष्टीकरण के अनुसार, दुर्घटना के मामले में यह जानकारी प्रसारित की जा रही थी कि वादिनी ने डायल-112 पर सूचना दी थी। इसके बाद मौके पर पहुंची पीआरवी ने दुर्घटना करने वाले व्यक्ति को हिरासत में लिया, लेकिन मुकदमा अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज किया गया। पुलिस ने इस बिंदु पर एफआईआर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया है। पुलिस के मुताबिक, वादिनी ने थाना खुर्जा नगर में अपने हस्तलेख से तहरीर दी थी। पुलिस के अनुसार, उस तहरीर में किसी व्यक्ति का नाम या किसी वाहन का विवरण दर्ज नहीं था। पुलिस ने कहा कि एफआईआर प्राप्त तहरीर में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दर्ज की जाती है। पुलिस के अनुसार, एफआईआर में अपनी ओर से कोई नया तथ्य नहीं जोड़ा जाता।

बुलंदशहर पुलिस ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी बताया कि दुर्घटना के समय पीआरवी द्वारा संबंधित व्यक्ति को अपने साथ ले जाया गया था। पुलिस के अनुसार, उसी दिन संबंधित व्यक्ति की पहचान और पते का सत्यापन किया गया। इसके बाद मामले की विवेचना के दौरान नियमानुसार बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत उसे नोटिस तामील कराया गया। पुलिस के मुताबिक, आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी करने के बाद विवेचना समाप्त की गई और आरोप पत्र न्यायालय में भेज दिया गया। इस तरह पुलिस ने दुर्घटना के मामले में एफआईआर से लेकर पहचान सत्यापन, नोटिस तामील और आरोप पत्र दाखिल किए जाने तक की कार्रवाई के संबंध में अपना पक्ष सामने रखा है।

बुलंदशहर पुलिस ने अपने स्पष्टीकरण में मुख्य रूप से यह स्पष्ट किया है कि वर्ष 2021 का मुकदमा और 19 अगस्त 2026 की सड़क दुर्घटना दो अलग-अलग प्रकरण हैं। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में कुछ खबरों में इन दोनों मामलों को आपस में जोड़कर प्रस्तुत किया गया। पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेजों और विवेचना में की गई कार्रवाई के आधार पर दोनों घटनाओं की अलग-अलग स्थिति बताई है। 2021 के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना पूरी की गई और आरोप पत्र न्यायालय में भेजा गया। पुलिस के अनुसार, यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं 19 अगस्त 2026 की सड़क दुर्घटना के मामले में भी पुलिस ने विवेचना पूरी होने और आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए जाने की जानकारी दी है।

बुलंदशहर पुलिस ने सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में की गई कुछ टिप्पणियों के संबंध में 30 सितंबर 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार, उसने उक्त लिखित आदेश का अवलोकन किया है। पुलिस का कहना है कि लिखित आदेश में न्यायालय की ओर से ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गई है, जैसी कुछ माध्यमों में प्रसारित की जा रही है। पुलिस ने इस संबंध में न्यायालय के लिखित आदेश और प्रसारित की जा रही टिप्पणियों के बीच अंतर की ओर ध्यान दिलाया है।

पुलिस के स्पष्टीकरण में एफआईआर दर्ज करने के आधार को भी प्रमुखता से स्पष्ट किया गया है। पुलिस के अनुसार, एफआईआर वादी की ओर से दी गई तहरीर में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दर्ज की जाती है। दुर्घटना के मामले में पुलिस के अनुसार, वादिनी द्वारा दी गई हस्तलिखित तहरीर में किसी व्यक्ति का नाम और वाहन का विवरण दर्ज नहीं था। इसी आधार पर पुलिस ने बताया कि एफआईआर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस के अनुसार, विवेचना के दौरान संबंधित व्यक्ति की पहचान और पते का सत्यापन किया गया तथा बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस की कार्रवाई की गई।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, दोनों प्रकरणों में विवेचना पूरी हो चुकी है। वर्ष 2021 के मामले में आरोप पत्र पहले ही न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। 19 अगस्त 2026 की सड़क दुर्घटना से संबंधित मामले में भी पुलिस ने विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में भेजे जाने की जानकारी दी है। इस प्रकार पुलिस के स्पष्टीकरण के अनुसार दोनों मामलों की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दोनों प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।