चंडीगढ़, 19 सितंबर 2026: केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में प्राकृतिक गैस पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर यानी वैट की दर 12.5 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। नई दर 18 सितंबर 2026 की मध्यरात्रि से लागू हो गई। प्रशासन के इस फैसले से संपीड़ित प्राकृतिक गैस यानी सीएनजी और पाइप वाली प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को टैक्स में राहत मिलेगी। प्रशासन के मुताबिक, वैट में कमी से प्राकृतिक गैस को अधिक किफायती बनाने और चंडीगढ़ में प्राकृतिक गैस से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इस कदम का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी है।
चंडीगढ़ प्रशासन के आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार प्राकृतिक गैस पर लागू वैट दर को 12.5 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। संशोधित दर 18 सितंबर की मध्यरात्रि से प्रभावी हुई। यह बदलाव चंडीगढ़ में प्राकृतिक गैस की श्रेणी में आने वाली सीएनजी और पीएनजी पर लागू होता है। इस फैसले से वैट की दर में 7.5 प्रतिशत अंक की कमी हुई है। प्रशासन का कहना है कि इससे प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वैट में कटौती और खुदरा कीमत में वास्तविक कमी को एक ही बात नहीं माना जा सकता। अधिसूचना में टैक्स दर बदली गई है, जबकि उपभोक्ता को मिलने वाली अंतिम कीमत गैस आपूर्तिकर्ता के मूल्य निर्धारण और अन्य लागतों पर निर्भर करती है।
चंडीगढ़ में घरेलू पीएनजी की कीमत करीब 54.70 रुपये प्रति एससीएम बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वैट में कटौती के बाद घरेलू पीएनजी की कीमत में करीब 3.42 रुपये प्रति एससीएम तक की कमी का अनुमान लगाया गया है। इसका वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं के बिल में कितना दिखाई देगा, यह अंतिम खुदरा दर पर निर्भर करेगा। गैस की मूल कीमत, वितरण लागत और अन्य लागू शुल्क भी अंतिम बिल को प्रभावित कर सकते हैं। पीएनजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से घरों में खाना पकाने के लिए किया जाता है। यह पाइपलाइन के जरिये सीधे रसोई तक पहुंचती है और एलपीजी सिलेंडर की तरह बार-बार सिलेंडर बुक कराने और उसकी डिलीवरी पर निर्भर नहीं रहती।
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प्राकृतिक गैस पर वैट घटने का असर सीएनजी पर भी पड़ सकता है। सीएनजी का इस्तेमाल निजी वाहनों के साथ-साथ ऑटो और कैब जैसे वाणिज्यिक वाहनों में भी किया जाता है। वैट में कमी से सीएनजी की लागत पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, सीएनजी की खुदरा कीमत में वास्तविक कमी कितनी होगी, यह संबंधित गैस आपूर्तिकर्ताओं की कीमत तय करने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। चंडीगढ़ प्रशासन की अधिसूचना ने वैट दर को संशोधित किया है, किसी एक नई खुदरा सीएनजी कीमत को निर्धारित नहीं किया है। इसलिए वाहन चालकों और ऑटो-कैब संचालकों के लिए इसका प्रभाव नई खुदरा दर लागू होने के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएगा।
चंडीगढ़ प्रशासन ने प्राकृतिक गैस पर टैक्स कम करने के फैसले को शहर में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल और बुनियादी ढांचे के विस्तार से भी जोड़ा है। प्रशासन के अनुसार कम वैट से प्राकृतिक गैस को अधिक किफायती बनाने में मदद मिल सकती है और इससे स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा। प्राकृतिक गैस कोयला और कई पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसी वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में पाइप वाली प्राकृतिक गैस और सीएनजी नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भी अगस्त 2026 में घरेलू पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार के लिए प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी थी। योजना का उद्देश्य सक्रिय घरेलू पीएनजी कनेक्शनों की संख्या बढ़ाना और अधिक परिवारों तक पाइप वाली गैस पहुंचाना है। सरकार ने राज्यों को प्राकृतिक गैस पर वैट को 5 प्रतिशत तक लाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी कही है।
चंडीगढ़ में पीएनजी नेटवर्क को विस्तार देने का लक्ष्य पहले से रखा गया है। प्रशासन ने करीब 1.70 लाख घरेलू पीएनजी कनेक्शन का लक्ष्य तय किया है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2026 तक चंडीगढ़ में घरेलू पीएनजी कनेक्शनों की संख्या 34,175 थी। यह निर्धारित लक्ष्य की तुलना में काफी कम है। इसी अवधि में शहर में लगभग 3.08 लाख एलपीजी कनेक्शन बताए गए थे। इन आंकड़ों के बीच वैट में कटौती को पीएनजी को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कम टैक्स से पीएनजी की लागत कम होने पर नए उपभोक्ताओं को जोड़ने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
चंडीगढ़ में पीएनजी नेटवर्क का विस्तार केवल नए घरेलू कनेक्शन देने तक सीमित नहीं है। इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क, वितरण व्यवस्था और संबंधित बुनियादी ढांचे का विस्तार भी जरूरी है। प्रशासन का कहना है कि प्राकृतिक गैस पर कम वैट से शहर में प्राकृतिक गैस के बुनियादी ढांचे के विकास और विस्तार को गति देने में मदद मिल सकती है। इससे भविष्य में ज्यादा इलाकों में पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को समर्थन मिल सकता है। देश के स्तर पर भी पीएनजी नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार 18 अगस्त 2026 तक देश में 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन थे। घरेलू पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 से प्रोत्साहन योजना लागू की है।
वैट यानी मूल्य वर्धित कर एक अप्रत्यक्ष कर है। भारत में 1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू होने के बाद ज्यादातर वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग राज्यों में लागू वैट व्यवस्था को जीएसटी व्यवस्था में शामिल कर दिया गया। हालांकि प्राकृतिक गैस और कुछ पेट्रोलियम उत्पाद अभी जीएसटी के दायरे में नहीं हैं। इसी कारण इन उत्पादों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग कर व्यवस्था लागू रहती है। चंडीगढ़ में प्राकृतिक गैस पर इसी वैट व्यवस्था के तहत कर लगाया जा रहा था। अब प्रशासन ने इसकी दर को 12.5 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।
सीएनजी यानी संपीड़ित प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल मुख्य रूप से वाहनों में ईंधन के तौर पर किया जाता है। ऑटो, कैब और अन्य वाहनों में इसका उपयोग आम है। वहीं पीएनजी यानी पाइप वाली प्राकृतिक गैस को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिये घरों और अन्य उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खाना पकाने के लिए किया जाता है। दोनों प्राकृतिक गैस आधारित ईंधन हैं, लेकिन इनके उपयोग और वितरण का तरीका अलग है।
यह सवाल अभी पूरी तरह खुदरा कीमतों में दिखाई देने वाली वास्तविक कमी पर निर्भर करेगा। वैट में 7.5 प्रतिशत अंक की कटौती निश्चित रूप से लागू हो चुकी है, लेकिन उपभोक्ता को मिलने वाली अंतिम कीमत केवल टैक्स दर से तय नहीं होती। चंडीगढ़ में घरेलू पीएनजी के लिए करीब 3.42 रुपये प्रति एससीएम तक कमी का अनुमान सामने आया है। सीएनजी के मामले में प्रति किलोग्राम अंतिम कमी संबंधित खुदरा मूल्य और आपूर्तिकर्ता की कीमत पर निर्भर करेगी। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए नई खुदरा दर और बिल में वास्तविक बदलाव संबंधित आपूर्तिकर्ता द्वारा लागू कीमतों के आधार पर स्पष्ट होगा।