देश में पिछले कुछ महीनों से गाडी का ईंधन भोजन से ज्यादा बड़ा मुद्दा बना हुआ है ईरान अमेरिका की जंग से पूरी दुनिया में पेट्रोल डीजल को लेकर परेशानियां बनी हुई है इस ही क्रम में ईंधन बचत और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपीलों के बीच अब पेट्रोलियम क्षेत्र में नया विवाद भी सामने आया है। देशभर के पेट्रोल डीलर्स के संगठन सीपीआईडी ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्था का दावा है कि एचपीसीएल के अधिकारी डीलर्स पर ग्राहकों को सामान्य पेट्रोल के बजाय महंगा प्रीमियम या पावर पेट्रोल बेचने का दबाव बना रहे हैं।
सीआईपीडी के अनुसार सामान्य पेट्रोल और प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में करीब 9 रुपये प्रति लीटर का अंतर है। संस्था का आरोप है कि जो डीलर प्रीमियम पेट्रोल बेचने के लिए तैयार नहीं होते, उन्हें ईंधन स्टॉक के ऑर्डर जारी करने में बाधा डाली जा रही है। संस्था ने दावा किया है कि यह स्थिति मुख्य रूप से एचपीसीएल के नेटवर्क में देखने को मिल रही है, जबकि इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड के डीलर्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
सीआईपीडी ने 13 मई को एचपीसीएल के मार्केटिंग निदेशक को पत्र लिखकर इस कथित दबाव और जबरदस्ती को तत्काल बंद करने की मांग की है। संस्था ने पत्र में यह भी कहा है कि यदि डीलर्स को स्टॉक देने के बदले किसी विशेष उत्पाद की बिक्री के लिए बाध्य किया जाता है, तो यह आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के प्रावधानों का उल्लंघन माना जा सकता है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने पर जोर दिया जा रहा है। तेल कंपनियों का कहना है कि मौजूदा हालात में उन्हें प्रतिदिन करीब 1700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, हालांकि खुदरा स्तर पर ईंधन की कीमतों में फिलहाल कोई वृद्धि नहीं की गई है। भारत में सामान्य पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग आमतौर पर 91 होती है, जो सामान्य कारों और दोपहिया वाहनों के लिए पर्याप्त मानी जाती है। वहीं प्रीमियम पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग 95 या उससे अधिक होती है, जैसे XP95 और XP100। उच्च ऑक्टेन रेटिंग वाले ईंधन में इंजन नॉकिंग की संभावना कम होती है और यह उच्च प्रदर्शन वाले इंजनों के लिए बेहतर माना जाता है।