कपिल सिब्बल से मिले 1 करोड़ रुपये के फंड पर उठे सवाल, चुनाव आयोग समेत तीन संस्थाओं में CJP के खिलाफ शिकायत

02 Aug 2026

कॉकरोच जनता पार्टी को कथित तौर पर मिले 1 करोड़ रुपये के फंड को लेकर नया विवाद सामने आया है। सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने चुनाव आयोग, सीबीआईसी और महाराष्ट्र सरकार को शिकायत भेजकर संगठन की फंडिंग, कानूनी स्थिति और इसके संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है।

अमित तिवारी का दावा है कि उन्होंने तीन अलग-अलग सरकारी संस्थाओं को भेजी शिकायतों में कई बिंदुओं पर जांच की मांग की है। इनमें संगठन के पंजीकरण की स्थिति, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा कथित रूप से दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड और अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति से जुड़े सवाल शामिल हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अमित तिवारी ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग विषयों को लेकर तीन संस्थाओं के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।

उनके अनुसार, चुनाव आयोग को भेजी गई शिकायत में सीजेपी के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने और उसके पंजीकरण की स्थिति की जांच की मांग की गई है। वहीं सीबीआईसी को भेजी शिकायत में कपिल सिब्बल द्वारा कथित रूप से दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड पर कर संबंधी पहलुओं की जांच करने का अनुरोध किया गया है।

 

#WATCH | Surat, Gujarat: RTI activist Amit Tiwari says, "I have filed a complaint at three different locations. I have complained against CJP at ECI. Regarding the Rs 1 Crore fund by Kapil Sibal, I have complained to CBIC (Central Board of Indirect Taxes and Customs) that 18% GST… pic.twitter.com/TYDy9Iy6cN

— ANI (@ANI) August 2, 2026

इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार को भेजी शिकायत में अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की आय और संपत्तियों की जांच कराने की मांग की गई है। अमित तिवारी का आरोप है कि भगवानराव दीपके एमआईडीसी में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और उनकी मासिक आय लगभग 60 हजार से 65 हजार रुपये थी।

उन्होंने शिकायत में सवाल उठाया है कि यदि आय का स्तर इतना था तो परिवार द्वारा बच्चों की अमेरिका में शिक्षा जैसे खर्च किस प्रकार वहन किए गए। तिवारी ने इन तथ्यों की जांच कराने और आवश्यकता होने पर आय से अधिक संपत्ति के पहलुओं की भी जांच किए जाने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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अमित तिवारी ने आरोप लगाया कि सीजेपी बिना चुनाव आयोग में पंजीकरण कराए राजनीतिक दल की तरह गतिविधियां संचालित कर रही है और लोगों से चंदा भी प्राप्त कर रही है।

उन्होंने शिकायत में कहा है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक दल की तरह कार्य करता है और सार्वजनिक रूप से फंड प्राप्त करता है, तो उसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत चुनाव आयोग में पंजीकरण कराना आवश्यक है। इसी आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

आरटीआई कार्यकर्ता ने सीजेपी के नेतृत्व में हुए आंदोलन को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि आंदोलन की शुरुआत नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों की आवाज उठाने के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन बाद में इसका स्वरूप बदल गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं तथा विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी भ्रामक बातें कही गईं। तिवारी का कहना है कि इन आरोपों को भी उन्होंने अपनी शिकायत का हिस्सा बनाया है।

अमित तिवारी ने कहा कि उनकी ओर से संबंधित एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

समाचार लिखे जाने तक चुनाव आयोग, सीबीआईसी, महाराष्ट्र सरकार, कॉकरोच जनता पार्टी, अभिजीत दीपके या राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की ओर से इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई थी।